مقال عن نظريات الربح | الهندية | عامل الدخل | اقتصاديات

فيما يلي مقال عن "نظريات الربح" للصف التاسع والعاشر والحادي عشر والثاني عشر. اعثر على فقرات ومقالات طويلة وقصيرة حول "نظريات الربح" مكتوبة خاصة لطلاب المدارس والكليات في اللغة الهندية.

مقال عن نظريات الربح


محتويات المقال:

  1. सिद्धान्त का मजदूरी सिद्धान्त (نظرية الأجور للربح)
  2. Rent का लगान सिद्धान्त (إيجار نظرية الربح)
  3. Dyn का प्रावैगिक सिद्धान्त (النظرية الديناميكية للربح)
  4. Innov का नव-परिवर्तन सिद्धान्त (نظرية الابتكار للربح)
  5. ivity का सीमान्त उत्पादकता सिद्धान्त (نظرية الإنتاجية الحدية للربح)
  6. Risk का जोखिम सिद्धान्त (نظرية مخاطر الربح)
  7. सिद्धान्त का अनिश्चितता वहन करने का सिद्धान्त (عدم اليقين ، نظرية الربح)
  8. सिद्धान्त का समाजवादी सिद्धान्त (النظرية الاشتراكية للربح)


مقال # 1. सिद्धान्त का मजदूरी सिद्धान्त ( نظرية الأجور للربح):

Ta सिद्धान्त को प्रसिद्ध अर्थशास्त्री टॉजिग (Taussig) ने प्रतिपादित किया किया और समर्थन अमेरिका के ही अर्थशास्त्री प्रो. Dev (ديفينبورت) ने किया। इन अर्थशास्त्रियों का विचार था कि लाभ लाभ मजदूरी दूसरा।। दूसरे दूसरे शब्दों में लाभ लाभ एक प्रकार से उद्यमी की है है जो जो उसे उसे उसे उसे उसे उसे उसे उसे।।।।।।

टॉजिग के शब्दों में، "लाभ एक प्रकार से साहसी (या उद्यमी) की मजदूरी है जो उसे उसकी विशेष योग्यता बुद्धिमानी है है।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।। मानसिक मानसिक मानसिक मानसिक मानसिक मानसिक मानसिक मानसिक मानसिक मानसिक मानसिक मानसिक मानसिक यदि आर्थिक प्रतिफल की दृष्टि से किया जाए तो उसे श्रम कहा जाता है।।

डॉक्टर ، अध्यापक ، वकील आदि की मानसिक सेवाएँ श्रम अन्तर्गत अन्तर्गत ही शामिल की जाती है। उद्यमी के कार्य को भी मानसिक कार्य जा सकता है और इसके बदले जो पुरस्कार पुरस्कार जाता जाता है है है वही लाभ है।।

आलोचना ( النقد):

आलोचकों के अनुसार टॉजिग ने श्रम और दोनों को एकसमान मानकर लाभ को मजदूरी का का रूप मान मान मान मान मान है है जो जो है।। श्रम की मजदूरी एवं साहसी के लाभ में अन्तर पाये पाये जाते जिनकी यह यह सिद्धान्त उपेक्षा है।।

दोनों में प्रमुख अन्तर हैं:

أنا. Resid एक अवशेष (بقايا) भुगतान है जबकि मजदूरी एक ठेका भुगतान है। Positive ऋणात्मक (سلبي) Positive सकता है जबकि मजदूरी Positive धनात्मक (إيجابي) रहती है।

ثانيا. उद्यमी को जोखिम व अनिश्चितताओं का सामना करना है जबकि जबकि श्रमिक को ऐसी कोई समस्या नहीं होती।

ثالثا. साहसी प्रतियोगिता में लाभ बढ़ते हैं क्योंकि साहसी (अथवा उद्यमी) अपनी वस्तु को ऊँची कीमत बेचता है है जबकि प्रतियोगिता प्रतियोगिता प्रतियोगिता में में कमी कमी होने होने होने होने होने होने होने होने होने होने प्रवृत्ति प्रवृत्ति।।।।

د. संयुक्त पूँजी कम्पनी के अंशधारी लाभ प्राप्त करते जबकि वे वे कोई भी मानसिक श्रम नहीं करते। आलोचकों के अनुसार उपर्युक्त मौलिक भेदों के कारण और लाभ लाभ को समानार्थी नहीं माना जा सकता।


مقالة # 2. Rent का लगान सिद्धान्त ( إيجار نظرية الربح):

Senior सिद्धान्त की मिल का श्रेय ब्रिटिश Senior (كبار) तथा मिल (مطحنة) Mill जाता है परन्तु प्रो प्रस्तुत करने करने का श्रेय अर्थशास्त्री प्रो. Walk (ووكر) को जाता है। यह सिद्धान्त वाकर के नाम से ही जाना जाता है। इस सिद्धान्त का आधार रिकार्डो का लगान सिद्धान्त है।

रिकार्डो के अनुसार लगान एक भेदात्मक उपज जो अधिक उर्वरता वाली भूमियों पर सीमान्त सीमान्त भूमि की अपेक्षा प्राप्त प्राप्त होती है।। जिस प्रकार भूमि के भिन्न भिन्न टुकड़ों की उपजाऊ शक्ति में अन्तर है उसी उसी प्रकार उद्यमियों की योग्यता योग्यता योग्यता योग्यता भी भी अन्तर है है।।

सीमान्त भूमि की भाँति सीमान्त उद्यमी सामान्य का व्यक्ति होता है और अपनी अपनी वस्तु उत्पादन लागत लागत ही बेच बेच बेच बेच पा के के कारण कोई कोई कोई कोई कोई कोई कोई कोई कोई कोई कोई कोई प्राप्त।।। हैं उद्यमी से अधिक योग्य व कार्यकुशल उद्यमी आधिक्य प्राप्त कर लेते हैं वही ، वही लाभ है है इस प्रकार लाभ योग्यता का लगान है।

आलोचना ( النقد):

हैं सिद्धान्त में प्रमुख दोष निम्न पाये जाते हैं:

أنا. यह सिद्धान्त एकाधिकारी लाभ व आकस्मिक लाभ की बात स्पष्ट नहीं करता।

ثانيا. सीमान्त उद्यमी की परिकल्पना ही गलत है क्योंकि लाभ न न मिलने पर उद्यमी व्यवसाय छोड़ जाता है।

ثالثا. संयुक्त पूँजी कम्पनी के हिस्सेदारों को जो लाभांश है उसमें उसमें योग्यता का प्रश्न ही नहीं आता।

د. लाभ व लगान दोनों में मौलिक अन्तर है लगान कभी कभी भी ऋणात्मक नहीं हो सकता।

v. यह सिद्धान्त लाभों में पाये जाने वाले को स्पष्ट स्पष्ट करता उसकी उसकी प्रकृति को स्पष्ट करता।।


مقال # 3. सिद्धान्त का प्रावैगिक सिद्धान्त ( النظرية الديناميكية للربح):

इस सिद्धान्त का प्रतिपादन प्रो. जे. बी. J (JB Clark) ने किया। लाभ स्थिर समाज की वस्तु न होकर गतिशील समाज में ही उत्पन्न होता है।। स्थिर अर्थव्यवस्था में लाभ नहीं मिलता केवल प्रबन्ध की मजदूरी मिलती है। एक स्थिर अर्थव्यवस्था में निश्चितता और ज्ञान की पूर्णता होती है।

प्रो. हैं के अनुसार गतिशील अर्थव्यवस्था की अग्र पाँच विशेषताएँ होती हैं:

أنا. Population बढ़ती जाती है (عدد السكان في تزايد) |

ثانيا. Capital में वृद्धि होती है (رأس المال آخذ في الازدياد) |

ثالثا. Method are विधियों में सुधार होता है (طرق الإنتاج آخذة في التحسن) |

د. हैं संस्थानों के Chan रूप भी बदल जाते अर्थात् संगठन संगठन हैं हैं हैं हैं हैं (أشكال المؤسسات الصناعية آخذة في التغير ، والشركات الأقل كفاءة تخرج من السوق وكلما نجحت الشركات الأكثر كفاءة) |

v. उपभोक्ताओं की आवश्यकताओं में वृद्धि होती रहती है (رغبات المستهلك تتكاثر) |

उपर्युक्त कारणों से अनिश्चितताएँ उत्पन्न होती हैं और कीमत लागत लागत में होने के के कारण लाभ उत्पन्न होता है।। समाज में परिवर्तन की गति तेज होने पर लाभ की मात्रा भी बढ़ती है।।

आलोचना ( النقد):

हैं ने इस सिद्धान्त के प्रमुख दोष निम्न बताये हैं:

أنا. सभी प्रकार के परिवर्तन लाभ को जन्म देते बल्कि केवल वे परिवर्तन जो अनिश्चित या या होते हैं हैं हैं हैं हैं को को जन्म जन्म हैं।।

ثانيا. यह कहना भी गलत है कि स्थिर अर्थव्यवस्था में लाभ बिल्कुल नहीं मिलता।

ثالثا. इस सिद्धान्त में लाभ और प्रबन्ध की मजदूरी बीच एक एक काल्पनिक अन्तर किया गया है।

د. इस सिद्धान्त में जोखिम तत्व की पूर्णतः उपेक्षा की गयी है।


مقال # 4. लाभ का नव-परिवर्तन सिद्धान्त ( نظرية الابتكار للربح):

इस सिद्धान्त का प्रतिपादन प्रो. J (JA Schumpeter) द्वारा किया गया। शुम्पीटर भी लाभ को गतिशील परिवर्तनों का मानते हैं परन्तु शुम्पीटर क्लार्क द्वारा बताये गये गये परिवर्तनों को को को को को का का कारण कारण मानते।।

हैं प्रक्रिया में सभी परिवर्तन जिनके कारण लागत कम और और बढ़े नव नव परिवर्तन परिवर्तन हैं जैसे नयी नयी मशीन، नयी उत्पादन तकनीकी، नये यन्त्रों का प्रयोग، कच्चे यन्त्रों का प्रयोग، कच्चे माल के मिलना मिलना، (वृद्धि माल के वृद्धि वृद्धि वृद्धि विज्ञापन कला द्वारा)। इन सभी से उत्पादन लागत कम हो है या माँग बढ़ सकती है अथवा दोनों दोनों स्थितियाँ स्थितियाँ उत्पन्न उत्पन्न उत्पन्न हो सकती हैं।।

उत्पादन लागत में कमी या माँग में वृद्धि से बढ़ता बढ़ता हैं और नव परिवर्तन परिवर्तन में अन्तर होता होता है। किसी व्यक्ति द्वारा नयी मशीन या नये का निर्माण आविष्कार कहलाता है परन्तु इसका उत्पादन उत्पादन पहला पहला प्रयोग प्रयोग प्रयोग नव नव नव नव नव नव नव नव।।। नव-परिवर्तन के कारण जो लाभ प्राप्त होते वे वे अस्थायी प्रकृति के होते हैं।

आलोचना ( النقد):

इस सिद्धान्त के प्रमुख दोष निम्न हैं:

أنا. उद्यमी का कार्य नव-परिवर्तन नहीं होता बल्कि जोखिम व अनिश्चितताओं अनिश्चितताओं को सहना होता।।

ثانيا. व्यवसाय में रहने के लिए लाभ आवश्यक होते परन्तु यह यह आवश्यक कि प्रत्येक प्रत्येक उद्यमी नव नव नव।।

ثالثا. लाभ को उत्पन्न करने वाले सभी महत्वपूर्ण तत्वों इस सिद्धान्त सिद्धान्त में छोड़ दिया गया है।


مقالة # 5. सिद्धान्त का सीमान्त उत्पादकता सिद्धान्त ( نظرية الإنتاجية الهامشية للربح):

वितरण का सीमान्त उत्पादकता सिद्धान्त साधनों के पुरस्कार की दृष्टि दृष्टि से एक वैज्ञानिक सिद्धान्त माना जाता है। इस सिद्धान्त के अनुसार यदि अन्य बातें रहें तो दीर्घकाल में किसी के के पुरस्कार पुरस्कार उसकी सीमान्त सीमान्त सीमान्त के समान समान समान होने प्रवृत्ति पायी पायी है।।।

उद्यमी की सीमान्त उत्पादकता अधिक होने पर की मात्रा अधिक होगी और उद्यमी की सीमान्त सीमान्त कम होने होने होने होने होने लाभ लाभ की की होगी।।

भूमि एक बात स्पष्ट रूप से कहना आवश्यक कि भूमि भूमि श्रम पूँजी साधन ऐसे हैं हैं सामान्य सामान्य उत्पादकता की की की जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा है इनकी इनकी इनकी इनकी इनकी इनकी इनकी इनकी इनकी जा जा जा जा जा of के नियम (قوانين النسب المتغيرة) लागू होने के के कारण बिन्दु के बाद सीमान्त उत्पादकता क्रमशः क्रमशः क्रमशः गिरती है।।

एक फर्म में उद्यमी की सीमान्त उत्पादकता ज्ञात करना है है क्योंकि फर्म में में एक ही उद्यमी होता है।। हाँ ، उद्योग की सीमान्त उत्पादकता ज्ञात की जा सकती है।

आलोचना ( النقد):

है सिद्धान्त की आलोचना निम्न बातों के आधार पर की गयी है:

أنا. यह सिद्धान्त माँग पर विचार करता है और पूर्ति पक्ष की उपेक्षा करता है।। इसे एकपक्षीय सिद्धान्त कहा जा सकता है।

ثانيا. साहसी या उद्यमी की सीमान्त उत्पादकता की सरलता से नहीं की जा सकती क्योंकि एक एक की स्थिति स्थिति स्थिति स्थिति स्थिति एक एक ही ही है।।

ثالثا. इस सिद्धान्त में भी लाभ के निर्धारक महत्वपूर्ण तत्वों को छोड़ दिया गया है।।


مقالة # 6. लाभ का जोखिम सिद्धान्त ( نظرية مخاطر الربح):

Haw अर्थशास्त्री हॉले (هاولي) Haw अनुसार लाभ जोखिम का पुरस्कार है उद्यमी का सबसे सबसे कार्य जोखिम जोखिम उठाना है।। उत्पादन के अन्य साधनों को उनके पुरस्कार निश्चित समय पर भुगतान कर दिया जाता है है उद्यमी को को को को प्रकार प्रकार की की जोखिमें हैं।।

जो निम्नलिखित हैं:

أ. Replacement की जोखिम (استبدال المخاطر):

क्योंकि बिल्डिंग व मशीनरी में घिसावट होती है।

ب. Proper जोखिम (المخاطر المناسبة):

जिसमें उत्पादन का न बिक पाना، व्यापार चक्रों चक्रों सामना करना، बाजार में प्रतिकूल परिस्थितियों का उत्पन्न होना، आदि؛

ج. Obs पड़ जाना (تقادم):

है उत्पादन तकनीकी तथा फैशन आदि के कारण प्लाण्ट के पुराने हो हो जाने की स्थिति आती है |

د. अनिश्चितता (عدم اليقين):

प्रतिस्थापन या घिसावट का अनुमान लगाया जा है परन्तु मशीन अथवा बिल्डिंग के पुराना पड़ पड़ के सम्बन्ध सम्बन्ध सम्बन्ध सम्बन्ध उचित उचित अनुमान अनुमान लगाना है।। वस्तु को उत्पन्न करने और बेचने में अन्तर होने के के हो सकता है कि कि के के अनुमान अनुमान अनुमान अनुमान अनुमान सिद्ध सिद्ध।।।

इसके फलस्वरूप उद्यमी को हानि भी हो सकती है। उद्यमी हानि तभी सहेगा जब उसे लाभ की अपेक्षा हो। हॉले यह मानते थे कि उद्यमी को तथा समन्वय का पुरस्कार लाभ के रूप में में मिलता बल्कि बल्कि बल्कि बल्कि बल्कि जोखिम जोखिम उठने उठने है।।

भविष्य की माँग उत्पादन तथा कीमत के में सही निकले यह आवश्यक नहीं है इसी इसी व्यवसाय व्यवसाय में में में जोखिम रहते हैं।।

आलोचना ( النقد):

हैं ने इस सिद्धान्त की निम्न त्रुटियाँ बतायी हैं:

أنا. जोखिम और लाभ के बीच कोई सहसम्बन्ध नहीं होता। Car (كارفر) के अनुसार उद्यमी को लाभ जोखिम कम करने के फलस्वरूप मिलता है।

ثانيا. जोखिम उठाने के अलावा भी उद्यमी कई महत्वपूर्ण करता है है जिन्हें उद्यमी द्वारा छोड़ दिया गया है।

ثالثا. प्रो. नाइट (فارس) के अनुसार लाभ ज्ञात जोखिमों बजाय अज्ञात अज्ञात जोखिमों सहने के के कारण है।।


مقالة # 7. लाभ का अनिश्चितता वहन करने का सिद्धान्त ( عدم اليقين ، نظرية الربح):

इस सिद्धान्त का प्रतिपादन शिकागो विश्वविद्यालय के प्रो. नाइट (فارس) Risk अपनी पुस्तक "المخاطرة وعدم اليقين والربح" में किया है। प्रो. नाइट अपने सिद्धान्त में इस बात पर देते कि कि उद्यमी लाभ जोखिम उठाने उठाने प्राप्त प्राप्त प्राप्त होता बल्कि बल्कि बल्कि उत्पादन अनिश्चितता अनिश्चितता अनिश्चितता सहन सहन सहन सहन सहन सहन सहन सहन सहन सहन सहन सहन सहन सहन सहन सहन सहन सहन सहन सहन सहन।।।।।

प्रो. R ने जोखिम (المخاطر) अनिश्चितता अनिश्चितता (عدم اليقين) में भेद किया है। उनके अनुसार सभी प्रकार के जोखिम उद्यमी के लिए अनिश्चितताएँ उत्पन्न नहीं करते।

जोखिम को अनिश्चितता के आधार पर. नाइट ने अग्र दो भागों में बाँटा है:

(1) जोखिम (المخاطر المعروفة)

(2) जोखिम (مخاطر غير معروفة) |

(1) जोखिम (المخاطر المعروفة):

है प्रक्रिया के उन जोखिमों को ज्ञात जोखिमों की दी दी जाती है जिनका उद्यमी पूर्वानुमान लगा सकता है है है؛ जैसे - आग، बाढ़، चोरी، दुर्घटना، टूट-फूट आदि घटनाओं का उद्यमी को पूर्वानुमान होता है। Method जोखिमों का अनुमान सांख्यिकीय रीतियों (الأساليب الإحصائية) द्वारा लगाया जा सकता है।

ज्ञात जोखिमों का पूर्वानुमान होने के कारण अपनी सुरक्षा के उपाय बीमा आदि सेवाओं सेवाओं की सहायता से कर कर सकता है।। Ins प्रकार ज्ञात जोखिम बीमा योग्य (المخاطر القابلة للتأمين) कहलाते हैं।

इस प्रकार ज्ञात जोखिमों में अनिश्चितता का उपस्थित रहता रहता ज्ञात जोखिमों का उद्यमी से ही ही करवाकर करवाकर अपने अपने अपने लेता लेता लेता है है है है है है है है है है है है है है है है है है है।।।।।।।।

दूसरे शब्दों में ، जोखिम की अनिश्चितता बीमा कम्पनी द्वारा वहन की जाती है। अतः उद्यमी को बीमा योग्य ज्ञात जोखिमों को करने का का कोई पुरस्कार देय नहीं होता। बीमा शुल्क की धनराशि उत्पादन लागत का एक होती है है जिसके लिए उद्यमी लाभ प्राप्त नहीं करता।

(2) जोखिम (مخاطر غير معروفة):

ज्ञात जोखिमों के विपरीत उद्यमी के लिए प्रक्रिया कुछ कुछ ऐसे विद्यमान रहते रहते हैं उद्यमी को नहीं नहीं होता होता होता होता होता अर्थात् बारे में में में सही सही सही सही सही सही सही सही सही सही सही सही सही सही सही सही सही सही सही सही सही सही ऐसे अनिश्चित जोखिमों को अज्ञात जोखिम कहा जाता है। प्रो. Un ने ऐसे अज्ञात जोखिमों अनिश्चितता (الشكوك) की संज्ञा दी है।

Un urable प्रकृति वाले जोखिम बीमा जोखिम (المخاطر غير القابلة للتأمين) कहलाते हैं। माँग माँग، कीमत، प्रतियोगिता، बाजार परिस्थितियाँ، सरकारी नीतियाँ आदि कुछ अनिश्चितताएँ उद्यमी के सदैव उपस्थित हैं हैं जिनका जिनका नहीं होता होता होता होता होता होता होता होता होता होता होता होता उद्यमी होता उद्यमी उद्यमी होता कर पाता पाता।।।।

प्रो. नाइट के अनुसार ، उद्यमी को ऐसी अनिश्चितता का पुरस्कार ही लाभ के रूप में है।।।।।। अयोग्य अयोग्य अयोग्य अयोग्य अयोग्य अयोग्य अयोग्य अनिश्चितताएँ अनिश्चितताएँ उपस्थित होंगी होंगी होंगी होंगी अधिक अधिक।।।।।

इस प्रकार प्रो. नाइट लाभ को जोखिम उठाने का पुरस्कार नहीं बल्कि अनिश्चितता अनिश्चितता उठाने का पुरस्कार मानते हैं।

आलोचना ( النقد):

हैं ने इस सिद्धान्त की निम्न आलोचनाएँ की हैं:

أنا. उद्यमी के अन्य महत्वपूर्ण कार्यों को इस सिद्धान्त में छोड़ दिया गया है ؛ जैसे-व्यवसाय में समन्वय का।

ثانيا. आलोचक अनिश्चितता वहन करना एक अलग साधन स्वीकार नहीं करते।

ثالثا. संयुक्त पूँजी कम्पनी के हिस्सेदारों को जो लाभांश होता है है उसमें वे अनिश्चितताओं का सामना नहीं करते। अतः कोई आवश्यक नहीं कि लाभ अनिश्चितताएँ सहने के परिणामस्वरूप ही प्राप्त हो।


مقال # 8. लाभ का समाजवादी सिद्धान्त ( النظرية الاشتراكية للربح):

Kar मार्क्स (كارل ماركس) ने इस सिद्धान्त का प्रतिपादन किया। पूँजीवादी व्यवस्था में उत्पादन का पारिश्रमिक श्रम को प्राप्त नहीं होता बल्कि वह जितना भाग उत्पादित करता है उससे कम भाग उसे प्राप्त हो पाता है । इस व्यवस्था में पूँजीपति श्रम का शोषण करता है और श्रम एक आधिक्य मूल्य (Surplus Value) का निर्माण करता है जिसे पूँजीपति हड़प कर जाता है ।

मार्क्स यह मानते थे कि लाभ एक प्रकार की कानूनी डकैती है जो पूँजीवादी व्यवस्था में श्रम के शोषण के फलस्वरूप पूँजीपति को प्राप्त होती है । श्रम शक्ति की यह विशेषता है कि यह अपने मूल्य से अधिक मूल्य का सृजन करती है ।

श्रम शक्ति का निर्धारण श्रम की पुनरूत्थान लागत पर निर्भर करता है अर्थात् उन वस्तुओं व सेवाओं के मूल्य पर जो श्रमिक को न्यूनतम निर्वाह-स्तर पर बनाये रखने के लिए आवश्यक हैं । मार्क्स के अनुसार लाभ श्रम शक्ति के शोषण के कारण उत्पन्न होता है ।

आलोचना ( النقد):

इस सिद्धान्त के विरुद्ध विद्वानों की तीखी प्रतिक्रियाएँ हुई हैं ।

उनमें से कुछ प्रमुख निम्नवत् हैं:

أنا. यह सिद्धान्त रिकार्डो के मूल्य सिद्धान्त पर आधारित है जिसके अनुसार श्रम ही मूल्य निर्धारित करता है । यह बात गलत है क्योंकि उत्पादन के अन्य साधन भी उत्पादन में योगदान देते है और वे भी समान रूप से महत्वपूर्ण हैं ।

ثانيا. लाभ जोखिम अनिश्चितता के कारण उत्पन्न होते हैं न कि श्रम के शोषण के कारण ।

ثالثا. समाजवादी व्यवस्था में भी लाभ का औचित्य है नहीं तो अर्थव्यवस्था में उथल-पुथल (Chaos) हो जाती है । सरकारी उद्यम यदि हानि ही देते रहें तो अर्थव्यवस्था की क्या स्थिति होगी हम इसकी कल्पना कर सकते हैं ।

د. लाभ को कानूनी डाका कहना उद्यमी की पृष्ठभूमि को समाप्त करना है ।


 

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