مقال عن العولمة | الهندية | العملية الاقتصادية | اقتصاديات

فيما يلي مقال حول "العولمة" للصف 9 و 10 و 11 و 12. ابحث عن فقرات ومقالات طويلة وقصيرة حول "العولمة" خاصةً لطلاب المدارس والجامعات باللغة الهندية.

مقال عن العولمة


محتويات المقال:

  1. Meaning का अर्थ (معنى العولمة)
  2. Defin की परिभाषाएँ (تعاريف العولمة)
  3. N की आवश्यकता (احتياجات العولمة)
  4. Features की विशेषताएँ या लक्षण (ميزات أو خصائص العولمة)
  5. प्रभाव या भूमण्डलीकरण के प्रभाव (تأثير العولمة)
  6. Const से सम्बद्ध कठिनाइयाँ (قيود العولمة)
  7. Suggest के सम्बन्ध में सुझाव (اقتراحات بشأن العولمة)


مقالة # 1. Meaning का अर्थ ( معنى العولمة):

वैश्वीकरण का सम्बन्ध मुख्यतः विश्व बाजारीकरण से लगाया जाता है। जो व्यापार अवसरों के विस्तार का द्योतक है। वैश्वीकरण में विश्व बाजारों के मध्य पारस्परिक उत्पन्न होती है क्योंकि देश की की सीमाओं न बँधकर बँधकर बँधकर की दशाओं दशाओं दशाओं का का करने की की की दशा दशा दशा दशा दशा दशा दशा दशा दशा।।।

इस उद्देश्य से विश्व का सूचना एवं परिवहन के माध्यम माध्यम से एकाकार हो जाना वैश्वीकरण है। है प्रकार की व्यवस्थाओं में खुली अर्थव्यवस्थाओं का जन्म होता है जो प्रतिबन्धों प्रतिबन्धों से मुक्त तथा जिसमें स्वतन्त्र व्यापार व्यापार है है। इस प्रकार वैश्वीकरण में बहुराष्ट्रीय कम्पनियों या नियमों का स्थान महत्वपूर्ण हो जाता है।।

वैश्वीकरण का अभिप्राय किसी देश की अर्थव्यवस्था विश्व अन्य अन्य देशों अर्थव्यवस्थाओं से जोड़ने जोड़ने है जिससे जिससे का का का का विश्व विस्तार विस्तार विस्तार हो हो हो हो हो हो हो हो हो हो हो हो हो हो हो हो हो हो हो सके हो।।।।। इस प्रकार वैश्वीकरण को अन्तर्राष्ट्रीयकरण के रूप में भी देखा जाता है। अन्य शब्दों में ، वैश्वीकरण का अर्थ देश की को विश्व विश्व की के के साथ एकीकृत है है।


مقالة # 2. Defin की परिभाषाएँ ( تعريفات العولمة):

है को विभिन्न अर्थशास्त्रियों ने निम्नलिखित प्रकार से परिभाषित किया है:

أ. ऑस्कर लेन्जे के अनुसार ، "आधुनिक समय में अल्प विकसित देशों के विकास का भविष्य मुख्यतः अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग सहयोग सहयोग पर पर निर्भर है।।"

ب. प्रो. दीपक नैय्यर के अनुसार ، "आर्थिक क्रियाओं का किसी देश की राजनैतिक के बाहर तक तक करने को को को वैश्वीकरण वैश्वीकरण हैं।"

ج. प्रो. एन. वाघुल के शब्दों में ، "वैश्वीकरण शब्द बाजार क्षेत्र के तीव्र गति से विस्तार को करता है है ، जो विश्वव्यापी पहुँच रखता है।"

د. जॉन नैसविट एवं पोर्टसिया अबुर्डिन अनुसार ”” ऐसे विश्व विश्व के रूप देखा चाहिए चाहिए जिसमें जिसमें सभी देशों का व्यापार किसी एक की की की की की की ओर ओर ओर।।।। । सम्पूर्ण विश्व एक अर्थव्यवस्था है तथा एक बाजार है। "

उपर्युक्त परिभाषाओं से यह निष्कर्ष निकलता कि वैश्वीकरण वैश्वीकरण वह है अर्थव्यवस्था अर्थव्यवस्था को को सम्पूर्ण विश्व विश्व की किया किया किया किया किया किया किया किया किया जाता किया जाता है जाता जाता जाता एक एक एक एक एक एक एक सके सके सके सके सके सके सके सके सके व्यवहारों के लिए व्यक्तियों ، पूँजी ، तकनीक माल ، सूचना तथा ज्ञान का पारस्पारिक विनिमय सुलभ हो सक े। वैश्वीकरण को सार्वभौमीकरण ، भूमण्डलीयकरण और अन्तर्राष्ट्रीय आदि नामों से भी पुकारा जाता है। "


مقالة # 3. N की आवश्यकता ( احتياجات العولمة):

वैश्वीकरण की आवश्यकता निम्नलिखित कारणों से है:

(1) वैश्वीकरण एकरूपता एवं समरूपता की एक प्रक्रिया है ، जिसमें सम्पूर्ण विश्व सिमटकर एक हो जाता है।

(2) अर्थव्यवस्था के तीव्र विकास के लिए वैश्वीकरण की नीति अपनायी गयी।

(3) एक राष्ट्र की सीमा से अन्य राष्ट्रों में वस्तुओं एवं का लेन देन करने वाले वाले अन्तर्राष्ट्रीय नियमों या बहुराष्ट्रीय बहुराष्ट्रीय के राष्ट्र राष्ट्र राष्ट्र राष्ट्र राष्ट्र राष्ट्र राष्ट्र राष्ट्र राष्ट्र राष्ट्र राष्ट्र राष्ट्र राष्ट्र।।।।

(4) विश्व के विभिन्न राष्ट्र पारस्परिक सहयोग सद्‌भावना के साथ बाजार की माँग माँग की सापेक्षित सापेक्षित के के के द्वारा वस्तुओं सेवाओं सेवाओं का का का का का क्रय क्रय क्रय क्रय क्रय क्रय क्रय क्रय क्रय।।।।

(5) इस नीति के अन्तर्गत 34 उद्योगों को सम्मिलित किया गया। में नीति के अन्तर्गत उच्च प्राथमिकता प्राप्त में 51٪ तक के विदेशी पूँजी विनियोग को अनुमति प्रदान की गयी।।

(6) वैश्वीकरण की नीति को विदेशी उन्नत से निर्मित वस्तुओं तथा राष्ट्र की औद्योगिक संरचना के आवश्यक आवश्यक बिजली बिजली बिजली، कोयला، पेट्रोलियम जैसे मूलभूत क्षेत्रों क्षेत्रों तक रखा रखा।।

(7) जिन मामलों में मशीनों के लिए विदेशी पूँजी उपलब्ध होगी ، उन्हें स्वतः उद्योग लगाने की अनुमति मिल जायेगी।

(8) विदेशी मुद्रा नियमन कानून में भी संशोधन किया गया।

(9) वर्तमान में अन्य निजी कम्पनियाँ भी में इकाइयाँ स्थापित स्थापित औद्योगिक विश्व व्यापीकरण की की अग्रसर हैं।

(10) वीडियोकॉन ، ओनिडा ، गोदरेज एवं बी. पी. एल. कम्पनियाँ कम्पनियाँ، जापान، जर्मनी एवं इटली की कम्पनियों का सहयोग लेकर किस्म किस्म की का का उत्पादन उत्पादन उत्पादन अत्यधिक अत्यधिक लाभ लाभ है है।।

(11) अन्तर्गत नीति के अन्तर्गत 12 करोड़ या कुल पूँजी के 25٪ से कम की उत्पादक मशीनें बिना पूर्वानुमति पूर्वानुमति पूर्वानुमति के आयात की सकेंगी।।

(12) प्रवासी भारतीय को पूँजी निवेश के लिए अनेक प्रोत्साहन तथा सुविधाएँ दी गयीं। भारतीय कम्पनियों को यूरो निर्गम जारी करने की अनुमति प्रदान की गयी है।

(13) वैश्वीकरण की दिशा में सरकारी क्षेत्र की उर्वरक कम्पनी कृषक भारतीय कोऑपरेटिव लि. को अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित एक फास्फेट कारखाने को अधिग्रहण कर संचालित करने की की अनुमति सरकार ने प्रदान प्रदान की है।।


مقال # 4. Features की विशेषताएँ या लक्षण ( ميزات أو خصائص العولمة):

वैश्वीकरण की प्रमुख लक्षण या विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

أنا. इसमें विश्व स्तर पर व्यापारिक बाधाओं को करने के प्रयत्न किये हैं जिससे जिससे दो के मध्य मध्य तथा तथा तथा सेवाओं सेवाओं एवं एवं निर्बाध निर्बाध निर्बाध निर्बाध निर्बाध निर्बाध निर्बाध निर्बाध निर्बाध गति गति।।।

ثانيا. वैश्वीकरण औद्योगिक संगठनों के विकसित स्वरूप को जन्म देता है।

ثالثا. राष्ट्र राष्ट्र ، अपने विशाल कोषों को ब्याज के लाभ में विकासशील में में विनियोजित करना पसन्द पसन्द करते करते ताकि ताकि उन्हें उन्हें उन्नत का लाभ लाभ लाभ सके।।।

د. राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय बाजारों में ऐसा वातावरण का प्रयास किया जाता है विभिन्न विभिन्न राष्ट्रों बीच सूचना सूचना प्रौद्योगिकी प्रौद्योगिकी का का का स्वतन्त्र उन्नत उन्नत उन्नत तकनीकी उन्नत तकनीकी तकनीकी तकनीकी तकनीकी तकनीकी तकनीकी तकनीकी तकनीकी तकनीकी तकनीकी तकनीकी तकनीकी तकनीकी तकनीकी।।

v. पूँजी व्यावसायिक संगठनों की आत्मा होती है। वैश्वीकरण के अन्तर्गत विभिन्न अनुबन्ध करने वाले राष्ट्रों के पूँजी पूँजी का स्वतन्त्र प्रवाह रहता है है जिससे जिससे पूँजी का का निर्माण सम्भव सके सके।

السادس. वैश्वीकरण बौद्धिक श्रम एवं सम्पदा का भी करता है अर्थात् एक से दूसरे दूसरे राष्ट्रों श्रमिक वर्ग वर्ग वर्ग वर्ग वर्ग वर्ग वर्ग का का रूप से से आवागमन आवागमन आवागमन आवागमन है।।।

السابع. है के परिणामस्वरूप अन्तर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवहारों पर लगे पर ढील ढील धीरे धीरे धीरे बढ़ती है है जिससे जिससे अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार व्यापार व्यापार उत्तरोत्तर वृद्धि है है।

الثامن. वैश्वीकरण का प्रतिफल सम्पूर्ण विश्व में संसाधनों आबंटन प्रयोग प्रयोग की आवश्यकता तथा प्राथमिकता आधार पर पर होने होने लगता लगता है विकासशील विकासशील विकासशील विकासशील विकासशील विकासशील विकासशील विकासशील विकासशील विकासशील विकासशील विकासशील विकासशील विकासशील विकासशील विकासशील विकासशील विकासशील विकासशील विकासशील विकासशील विकासशील विकासशील विकासशील विकासशील विकासशील विकासशील विकासशील विकासशील विकासशील विकासशील होने होने प्राप्त है है प्राप्त है है है है है .


مقالة # 5 . प्रभाव या भूमण्डलीकरण के प्रभाव ( تأثير العولمة):

भिन्न-भिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाओं में विश्व के प्रभाव का का अनुभव किया जा रहा है। प्रत्येक देश का उद्योग तथा व्यापार विश्व के भागों में में हो रहे परिवर्तनों से प्रभावित होता है। सम्पूर्ण विश्व एक बाजार बन चुका है। आधुनिक अर्थव्यवस्थाएँ खुली अर्थव्यवस्था होती हैं और व्यवसाय वैश्विक स्थिति प्राप्त करता जा रहा है।। इस प्रकार हम देखते हैं कि अनेक बहुराष्ट्रीय भिन्न भिन्न भिन्न देशों में कार्य कार्य कर रही हैं।

अन्तर्राष्ट्रीय उपक्रम भी देखने को हैं हैं वैश्विक विपणन के लिए दूरदर्शन के संजाल का प्रयोग किया जाता है। अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ، अन्तर्राष्ट्रीय पुनर्निर्माण एवं विकास बैंक ، विश्व व्यापार संगठन जैसी अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं की स्थापना की जा जा है।। इन सभी से यह पता चलता है कि वैश्वीकरण भूमण्डलीकरण भूमण्डलीकरण का प्रत्येक स्थान स्थान पर दिखायी पड़ रहा है।।

संक्षेप में ، वैश्वीकरण के प्रभावों को निम्नलिखित प्रकार से स्पष्ट कर सकते हैं:

1. Development चेतना का विकास ( تنمية الوعي الاجتماعي):

शिक्षा के प्रचार प्रसार ने लोगों की सोच को प्रभावित किया है। रूढ़िवादी विचार का स्थान उदारवादी विचार ले रहे हैं। जीवन-स्तर में सुधार हुआ है तथा शैली शैली में परिवर्तन स्पष्ट रूप से दिखायी दिखायी रहे हैं।। सन्देशवाहन के उन्नत साधनों से विश्व का आकार छोटा हो गया है। विकसित देशों की सोच एवं जीवन के ढंग अनुसरण अन्य अन्य देशों लोगों द्वारा द्वारा किया जा है।।

व्यवसाय से की जाने वाली अपेक्षाएँ बढ़ती जा रही हैं। था लोगों को जो कुछ उद्योग प्रदान करता था वे उससे सन्तुष्ट रहते थे किन्तु अब उचित उचित मूल्यों मूल्यों मूल्यों उत्तम उत्तम उत्तम गुणवत्ता हैं हैं।। है प्रतिस्पर्धा ने ऐसी स्थिति उत्पन्न कर दी है जहाँ केवल केवल वे उपक्रम जीवित पायेंगे पायेंगे जो जो उपभोक्ताओं की की सन्तुष्टि के वस्तुओं तथा तथा सेवाओं सेवाओं सेवाओं सेवाओं सेवाओं सेवाओं।।।।

लोग व्यवसाय को सामाजिक रूप से भी प्रत्युत्तर बनना देखना चाहते हैं। है इकाइयों द्वारा प्रदूषण का नियन्त्रण भी एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें व्यवसाय व्यवसाय को महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करना है।। इस प्रकार व्यवसाय के वैश्वीकरण ने समाज में नये प्रकार प्रकार की सामाजिक चेतना को जन्म दिया है।

2. परिवर्तन (تغييرات التكنولوجيا):

विश्व में बहुत तेजी से प्रौद्योगिकी परिवर्तन हो रहे हैं। औद्योगिक इकाइयाँ प्रतिदिन नये-नये एवं श्रेष्ठतर उत्पादों का निर्माण कर कर हैं।। दूरसंचार एवं परिवहन की उन्नत विधियों ने विश्व विपणन में क्रान्ति सी ला दी है।। उपभोक्ता अब इतना सचेत हो गया है कि प्रतिदिन से से श्रेष्ठ उत्पाद प्राप्त करना चाहता है। कम्पनियाँ शोध एवं विकास पर अत्यधिक धन खर्च कर रही हैं। इस प्रकार तीव्र प्रौद्योगिकी परिवर्तनों ने उत्पादों के लिए विश्व बाजार उत्पन्न कर दिया है।।

3. Form का वैश्विक स्वरूप (النموذج العالمي للأعمال):

आधुनिक व्यवसाय स्वभाव से वैश्विक बन गया है। निर्माणी वस्तुओं में विशिष्टीकरण का गुण पाया जाता है। ये वस्तुएँ वहीं उत्पादित की जाती हैं जहाँ उत्पादन लागत की प्रतिस्पर्धा होती है।। इस प्रकार की वस्तुएँ अन्य देशों को निर्यात की जाती हैं। हैं वस्तुएँ जो मितव्ययी ढंग से उत्पादित नहीं की जा सकती हैं बाहर बाहर से आयात की जाती हैं।

हैं संख्या में बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ भारत में प्रवेश कर हैं हैं जो विभिन्न देशों देशों की निर्यात निर्यात करने करने लिए लिए भारत भारत में उत्पादन सुविधाओं सुविधाओं सुविधाओं सुविधाओं सुविधाओं सुविधाओं सुविधाओं सुविधाओं भी का भी।।। इस प्रकार ، भारतीय व्यवसाय वैश्विक आर्थिक प्रवृत्तियों से प्रभावित है।


مقال # 6 . Const से सम्बद्ध कठिनाइयाँ ( قيود العولمة):

हैं की राह में आने वाली कठिनाइयों में से का का हम निम्न रूप में में उल्लेख सकते सकते हैं:

1. प्रतिस्पर्द्धा ( المنافسة غير المتكافئة):

वैश्वीकरण ने असमान प्रतिस्पर्द्धा को जन्म दिया है। यह प्रतिस्पर्द्धा है 'शक्तिशाली बहुराष्ट्रीय निगमों' और 'कमजोर (व आकार में में बहुत छोटे) भारतीय उद्यमों' के बीच।

वस्तुतः भारत की बड़ी औद्योगिक इकाइयाँ भी बहुराष्ट्रीय की तुलना में बहुत छोटी और हैं और और से कुछ कुछ कुछ इकाइयों कम्पनियाँ कम्पनियाँ कम्पनियाँ कम्पनियाँ कम्पनियाँ कम्पनियाँ कम्पनियाँ कम्पनियाँ कम्पनियाँ कम्पनियाँ कम्पनियाँ कम्पनियाँ कम्पनियाँ कम्पनियाँ कम्पनियाँ कम्पनियाँ कम्पनियाँ कम्पनियाँ कम्पनियाँ कम्पनियाँ कम्पनियाँ अस्तित्व अस्तित्व अस्तित्व अस्तित्व।।।।।।।।। Integ कि पश्चिमी पश्चिमी बंगाल एक एक संसद सदस्य कहा है ”” के सार्वभौमीकरण सार्वभौमीकरण का है हाथियों हाथियों के घुसना घुसना (((((دمج الفأر في قطيع من الفيلة)।

हैं राज नय्यर के अनुसार असमान प्रतिस्पर्द्धा के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

(أ) भारतीय उद्यम 'आकार' में बहुराष्ट्रीय निगमों की तुलना में बहुत छोटे हैं।

(ب) भारतीय उद्यमों के लिए पूँजी की बहुराष्ट्रीय निगमों की की तुलना बहुत बहुत अधिक है।

(ج) 1991 से पूर्व चार दशक तक भारतीय क्षेत्र अत्यन्त अत्यन्त संरक्षणवादी माहौल में काम करता रहा।

(د) देश में उत्पादित कई वस्तुओं पर ऊँचे और बहुत बहुत स्तरों परोक्ष परोक्ष कर लगाये हैं।।

(هـ) भारतीय उद्यम अभी भी पहले के नियमों से जकड़े हुए हैं।

(و) कुछ क्षेत्रों में भारत सरकार नीतियों में खुले रूप रूप बहुराष्ट्रीय निगमों के साथ पक्षपात किया गया है।। उन्हें करों में ऐसी छूटें दी गयी हैं जो भारतीय उद्यमियों को उपलब्ध नहीं हैं हैं؛ Counter क्षेत्र में में परियोजनाओं के गारण्टी गारण्टी Counter Counter Counter Counter Counter Counter Counter Counter Counter Counter Counter की की गयी जबकि भारतीय भारतीय उद्यमियों उद्यमियों उद्यमियों यह यह नहीं है है।।

2. विदेशों में बढ़ता हुआ संरक्षणवाद (تزايد الحمائية في الخارج):

महत्वपूर्ण ही के वर्षों में अन्तर्राष्ट्रीय आर्थिक परिवेश में महत्वपूर्ण गुणात्मक गुणात्मक परिवर्तन देखने को आ रहे हैं। औद्योगिक देशों में जब तेज गति से हो रहा था ये ये देश मुक्त व्यापार थे थे थे विगत कुछ कुछ कुछ वर्षों से से से यहाँ यहाँ यहाँ यहाँ यहाँ यहाँ यहाँ यहाँ यहाँ यहाँ यहाँ यहाँ यहाँ यहाँ यहाँ यहाँ यहाँ यहाँ यहाँ यहाँ यहाँ यहाँ यहाँ यहाँ यहाँ यहाँ यहाँ यहाँ यहाँ यहाँ है। है।।।।।।।

उदाहरण के लिए :

(أ) जब भारतीय स्कर्ट (लहँगे) संयुक्त राज्य अमेरिका में अत्यन्त बनने लगे तो यह धारणा धारणा फैला गयी गयी कि कि ये पदार्थ पदार्थ पदार्थ पदार्थ से से हैं हैं।।

(ب) हाल ही में यूरोपीय संघ (الاتحاد الأوروبي) के देशों ने भारतीय भारतीय निर्यात पर डम्पिंग विरोधी शुल्क (مكافحة الإغراق واجب) लगा दिया है।

(ج) विकसित देशों ، जिनमें विशेषकर संयुक्त राज्य उल्लेखनीय उल्लेखनीय ، है श्रम-श्रम (معايير العمل) का मुद्दा उठाया ، ताकि भारत से होने कालीनों कालीनों के के के के।।।।

3. क्षेत्रीय व्यापार गुटों की स्थापना (تشكيل كتل التداول الإقليمية):

वस्तुओं की आधारभूत मान्यता यह है कि देशों वस्तुओं वस्तुओं वस्तुओं और पूँजी पर किसी प्रकार प्रकार प्रतिबन्ध प्रतिबन्ध प्रतिबन्ध विपरीत विपरीत विपरीत विपरीत विपरीत विपरीत विपरीत सभी सभी सभी सभी सभी सभी सभी विपरीत सभी विपरीत जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा अन्तर्राष्ट्रीय अन्तर्राष्ट्रीय की कुंजी मानते हैं। इस समय 15 से अधिक व्यापारिक गुट बने हुए हैं । इन गुटों की स्थापना से स्वतन्त्र प्रतियोगिता की प्रक्रिया बन्द हो जाती है ।

4. तकनीकी उन्नति को बढ़ावा देने की आवश्यकता (Need to Stimulate Technical Progress):

वैश्वीकरण के लिए आवश्यक है कि विकसित देश पूर्ण संकल्प और निष्ठा के साथ विकासशील देशों में प्रयोग आने वाली उत्पादन तकनीकों में क्रान्तिकारी परिवर्तन लायें, ताकि वैश्वीकरण का लाभ विकासशील देशों को भी मिले तथा वैश्वीकरण की नीति टिकाऊ हो सके ।

5. सीमित वित्तीय साधन (Limited Financial Resources):

अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में वस्तु प्रतियोगिता कर सके, इसके लिए वस्तु की किस्म में सुधार व उत्पादन बढ़ाने के लिए बड़ी मात्रा में पूँजी की आवश्यकता होगी परन्तु विकासशील देशों में पूँजी का अभाव है । फलतः इन देशों को वित्तीय संसाधन जुटाने के लिए विश्व बैंक व मुद्रा कोष आदि अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं के पास जाना पड़ता है जो अनुचित शर्तों पर वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराते हैं ।

6. अनुचित क्षेत्र में प्रवेश (Entry in Unwanted Area):

वैश्वीकरण नीति के तहत बहुराष्ट्रीय कम्पनियों का प्रवेश अधिकाधिक उपभोक्ता क्षेत्र और सेवा क्षेत्र में हो रहा है जो उचित नहीं है । आर्थिक ससंचना के विनियोग पर 16 से 18% की प्रत्याय दर गारण्टी का आश्वासन भी अनुचित है । इसी प्रकार बीमा क्षेत्र को विदेशी कम्पनियों के लिए खोलने का स्वाभाविक परिणाम यह होगा कि भारतीय बचत और भी कम होगी ।

7. अन्य समस्याएँ (Other Problems):

(a) उपयुक्त वातावरण की आवश्यकता:

देश की अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक सुधार पूर्ण रूप से नहीं हो सके हैं क्योंकि जिन देशों ने वैश्वीकरण को अपनाया है, उन्होंने अपने यहाँ पूर्व में ही उसके लिए वातावरण तैयार किया है, साथ ही हमारे देश की स्वतन्त्र बाजार की दिशा में गति भी धीमी रही है ।

( b) प्रतिकूल स्थिति:

अमेरिका भारत पर 'स्पेशल 301' व 'बौद्धिक सम्पदा' अधिकार सम्बन्धी अवधारणा को स्वीकार करने के लिए दबाव डाल रहा है । ऐसी स्थिति में यदि हम वैश्वीकरण को स्वीकार करते हैं तो हमारी अर्थव्यवस्था बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के हाथों चली जायेगी तथा यदि अस्वीकार करते हैं तो भारत को वैश्वीकरण में अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ेगा ।

( c) श्रमिकों में भय:

भारतीय श्रमिकों का मानना है कि देश में आधुनिक मशीनों की स्थापना से कम श्रमिकों की आवश्यकता होगी, साथ ही कारखानों में छँटनी होगी तथा वे प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होंगे ।


Essay # 7 . वैश्वीकरण के सम्बन्ध में सुझाव ( Suggestions Regarding Globalization):

भारतीय अर्थव्यवस्था के सन्दर्भ में वैश्वीकरण की प्रक्रिया को तेज करने के लिए कुछ प्रमुख सुझाव निम्नलिखित हैं:

I. भारतीय उत्पादकों की प्रतिस्पर्द्धा क्षमता में सुधार (Improvement in Competitiveness of Indian Producers):

विश्व बाजार में सफलता प्राप्त करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हमें अपनी प्रतिस्पर्द्धा क्षमता में सुधार लाना चाहिए ।

प्रतिस्पर्द्धा क्षमता में सुधार के लिए आवश्यक है:

(a) उत्पादकता में तीव्र वृद्धि

(b) वस्तुओं की गुणवत्ता में सुधार

(c) विकसित उत्पादन तकनीकों का विकास

(d) भारतीय कम्पनियों की संगठनात्मक पुनर्रचना |

यह उल्लेखनीय है कि कम्पनी की कुशलता की कसौटी अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर काम करने वाली कम्पनियों की कार्यकुशलता एवं उत्पादकता को मानना चाहिए और उस स्तर को प्राप्त करने के लिए सभी प्रयास करने चाहिए ।

II. MNC s से गठबन्धन (Alliance with MNC s ):

भारत में बड़ी संख्या में MNC s का प्रवेश हो रहा है । MNC s के पास अपेक्षाकृत अधिक वित्तीय क्षमता, व्यापारिक अनुभव और कुशलता है । अतः MNC s और घरेलू कम्पनियों के परस्पर हित में है कि वे आपसी गठबन्धन में बँधे ।

III. तकनीक में आत्मनिर्भरता (Self-Sufficiency in Technology):

विश्वव्यापीकरण का लाभ भारत जैसे विकासशील देशों को तभी प्राप्त होगा जब वे अद्यतन तकनीक का उपयोग करेंगे ।

IV. अन्तर्राष्ट्रीय संरक्षणवाद से मुकाबला (Facing International Protectionism):

अन्तर्राष्ट्रीय संरक्षणवाद से निपटने के लिए एक ओर तो हमें घरेलू उपकरणों में विदेशियों की भागीदारी को बढ़ाना होगा, ताकि विदेशी उपक्रमी अपनी सरकारों पर संरक्षण की नीति अपनाने के विरोध में दबाव बनायें और दूसरी ओर, हमें घरेलू ब्राण्डों को विदेशी बाजारों में विकसित करना होगा, ताकि विदेशी क्रेता हमारे ही उत्पाद खरीदने के लिए उत्सुक रहें ।

V. कृषि व लघु क्षेत्र का आधुनिकीकरण (Modernization of Agriculture at Small Sector):

भारत चूँकि एक कृषि-प्रधान देश है, अतः भारतीय अर्थव्यवस्था की विश्वव्यापीकरण प्रक्रिया में भागीदारी तब तक व्यर्थ रहेगी जब तक कृषि एवं लघु क्षेत्र इस प्रयास में योगदान नहीं देता ।

अतः कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए आवश्यक है कि:

(a) कृषि से सम्बद्ध सभी उत्पादन क्रियाओं को जिनमें बीज बोने से कृषि उपज की बिक्री तक के सभी काम शामिल हैं, व्यावसायिक लिबास पहनाना होगा ।

(b) कृषि से सम्बद्ध उपरिढाँचे को विकसित करना होगा ।

(c) कृषि क्षेत्र में शोध एवं विकास के विस्तार की नितान्त आवश्यकता है जिससे कि ऐसे उत्पादों का निर्माण हो सके जो कि अन्तर्राष्ट्रीय गुणवत्ता के स्तर पर खरे उतर सकें ।

अतः निष्कर्ष के रूप में कहा जा सकता है कि यद्यपि हमारी अर्थव्यवस्था वैश्वीकरण की दिशा में चल चुकी है परन्तु इस दिशा में किये गये प्रयासों की सफलता में सन्देह ही है ।

इस समय न तो अन्तर्राष्ट्रीय वातावरण ही उपयुक्त है और न ही हमारी आन्तरिक आर्थिक व सामाजिक परिस्थितियाँ ही इसके लिए तैयार हैं – देश इस बात के लिए एकमत बनता जा रहा है कि अन्धाधुन्ध वैश्वीकरण की अपेक्षा चयनात्मक वैश्वीकरण (Selective Globalization) की नीति अपनानी चाहिए ।

वस्तुतः भारत में घरेलू उदारीकरण व बाहरी उदारीकरण की प्रक्रियाएँ साथ-साथ चलने से कुछ कठिनाइयाँ आने लगी हैं लेकिन प्रयत्न करने पर हम आधुनिकीकरण, मानवीय विकास व सामाजिक न्याय में ताल-मेल बैठाते हुए अर्थव्यवस्था को अधिक प्रतिस्पर्द्धा व अधिक कार्यकुशल बना सकते हैं ।

अन्य देशों ने पहले घरेलू उदारीकरण को सुदृढ़ किया और अपनी अर्थव्यवस्था को सबल व सक्षम बनाया और बाद में बाहरी उदारीकरण का मार्ग अपनाया । समयाभाव के कारण हमें विश्व की प्रतियोगिता में आगे बढ़ाने के लिए एक साथ दोनों मोर्चों पर कार्य करना होगा ।


 

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