مقال عن اقتصادي الأعمال | الهندية | اقتصاديات

فيما يلي مقال عن "اقتصادي الأعمال" للفصل 9 و 10 و 11 و 12. ابحث عن الفقرات والمقالات الطويلة والقصيرة حول "اقتصادي الأعمال" والتي كُتبت خصيصًا لطلاب المدارس والكليات في اللغة الهندية.

مقال عن اقتصادي الأعمال


محتويات المقال:

  1. Meaning अर्थशास्त्री का अर्थ (معنى اقتصادي الأعمال)
  2. कार्य अर्थशास्त्री के कार्य (وظائف اقتصادي الأعمال)
  3. D अर्थशास्त्री के कर्त्तव्य (واجبات اقتصادي الأعمال)
  4. ibilities अर्थशास्त्री के उत्तरदायित्व (مسؤوليات خبير الأعمال)
  5. Role अर्थशास्त्री की भूमिका एवं महत्व (دور وأهمية اقتصادي الأعمال)


مقال # 1. Meaning अर्थशास्त्री का अर्थ (معنى اقتصادي الأعمال):

शब्दार्थ में व्यावसायिक अर्थशास्त्र के ज्ञाता को अर्थशास्त्री कहते हैं लेकिन इस से से व्यावसायिक व्यावसायिक के कार्य कार्य कार्य उसके दायित्वों दायित्वों दायित्वों का ज्ञान नहीं नहीं है।।। वस्तुतः एक व्यावसायिक अर्थशास्त्री किसी संस्था का अधिकारी होता है जो कि सर्वोच्च प्रबन्ध को को मामलों पर पर पर पर देने देने हेतु हेतु नियुक्त है।।

प्रबन्ध के ज्ञान की आवश्यकता विभिन्न देशों बढ़ती जा रही है जिसके विभिन्न विभिन्न गैर व्यावसायिक व्यावसायिक प्रतिष्ठानों प्रतिष्ठानों प्रतिष्ठानों में प्रबन्धकीय प्रबन्धकीय प्रबन्धकीय वाले अर्थशास्त्रियों अर्थशास्त्रियों अर्थशास्त्रियों अर्थशास्त्रियों अर्थशास्त्रियों अर्थशास्त्रियों अर्थशास्त्रियों अर्थशास्त्रियों अर्थशास्त्रियों अर्थशास्त्रियों अर्थशास्त्रियों अर्थशास्त्रियों अर्थशास्त्रियों अर्थशास्त्रियों अर्थशास्त्रियों अर्थशास्त्रियों अर्थशास्त्रियों अर्थशास्त्रियों।।

प्रबन्धकीय दक्षता रखने वाला अर्थशास्त्री अपने विशेष के द्वारा सही सही एवं भावी नियोजन की की समस्याओं समस्याओं को को को को को कर कर।।। निर्णयन जो व्यक्ति निर्णयन (صنع القرار) तथा भावी नियोजन (التخطيط الأمامي) के निर्माण में मदद करता है، 'व्यावसायिक अर्थशास्त्री' कहलाता है।

प्रबन्ध का एक महत्वपूर्ण कार्य निर्णय लेना है तथा को को सही में क्रियान्वित क्रियान्वित करने में मदद करना है।। पीटर ड्रकर के अनुसार، "प्रबन्धक जो कुछ भी करता है، निर्णयों के द्वारा ही है।। यह सभी जानते जानते कि दिन दिन दिन दिन दिन दिन दिन दिन दिन अनेक अनेक अनेक कार्यों कार्यों कार्यों कार्यों कार्यों कार्यों कार्यों इन कार्यों इन विकल्प।।।।।।।

है विकल्पों में से सर्वोत्तम विकल्प कौन-सा है؟ इसको निश्चित करना ही 'निर्णयन' है। टैरी ने इस सम्बन्ध में यह कहा कि प्रयम्बकों प्रयम्बकों का का जीवन निर्णय।। इन्होंने इन्होंने आगे आगे कहा कि कि कि कि कि कि कि कि है है है है है है है، तो वह उसका।।। निर्णय प्रबन्ध के सभी कार्यों - नियोजन، संगठन، निर्देशन، नियन्त्रण आदि के अन्तर्गत सम्मिलित है। "

साइमन का यह विचार कि 'निर्णय लेना' ही प्रबन्ध है ، बहुत उचित प्रतीत प्रतीत होता है है साइमन के विचार से कोई सहमत हो न हो परन्तु परन्तु निर्विवाद सत्य है कि कि ही ही व्यवसाय व्यवसाय व्यवसाय व्यवसाय व्यवसाय मुख्य मुख्य।।। है निर्णय का महत्व इसलिए और भी बढ़ है है क्योंकि प्रबन्धकों की क्षमता एवं सफलता माप माप उनके उनके उनके लिये लिये गये निर्णयों ही ही निश्चित है।।

निर्णय लेने में और भविष्य के लिए करने में व्यावसायिक अर्थशास्त्री नियुक्त किये जाते हैं हैं उनकी सेवाएँ सेवाएँ सेवाएँ सेवाएँ सेवाएँ को को उपलब्ध उपलब्ध हैं।। विकसित राष्ट्रों में व्यावसायिक अर्थशास्त्री को एक पेशेवर व्यक्ति माना जाता है। अपने देश में भी व्यावसायिक अर्थशास्त्री की आवश्यकता को समझा जाने लगा है। व्यावसायिक अर्थशास्त्री की उपयोगिता निरन्तर बढ़ती जा रही है।


مقال # 2. ctions अर्थशास्त्री के कार्य ( وظائف اقتصادي الأعمال):

व्यावसायिक अर्थशास्त्री किसी व्यावसायिक संस्था का एक महत्वपूर्ण अधिकारी होता है।

है अर्थशास्त्री के कार्यों को दो स्तरों पर विभक्त किया जा सकता है:

I. बौद्धिक कार्य

II. चयन कार्य

दोनों कार्यों की व्याख्या नीचे दी गयी है:

I. बौद्धिक कार्य (وظائف التفكير):

(ط) समस्या की जानकारी करना।

(ii) समस्या के सभी पहलुओं का अध्ययन करना।

(ج) समस्या का सरल रूप में प्रस्तुतीकरण करना।

(iv) समस्या के हल का उपयुक्त समय निर्धारित करना।

(1) संकल्पन (الحمل):

समस्या के सम्बन्ध में हुए प्रत्यक्ष ज्ञान से का विकास विकास इस अवस्था में होता है।

इस स्थिति में निम्न कार्य आते हैं:

(i) समस्या हल के विभिन्न विकल्पों को सोचना، तथा

(ii) विभिन्न विकल्पों का मूल्यांकन करना।

(2) खोज (التحقيق):

विकसित विचारों के सम्बन्ध में तथ्यों का अन्वेषण किया जाता है। समस्या की जानकारी के बाद उसके हल के लिए साधन खोजे जाते हैं।

इस प्रक्रिया में निम्न कार्य आते हैं:

(i) समस्या हल के लिए साधनों की खोज करना، तथा

(ii) समस्या के हल में आने वाली रुकावटों का पता लगाना।

II. Select कार्य (وظائف الاختيار):

समस्या पर गम्भीरतापूर्वक विचार करने के बाद एक व्यावसायिक उसके उसके समाधान लिए सर्वोत्तम सर्वोत्तम विकल्प का चयन करता है।। जाये भी समस्या को हल करने के लिए से तरीके तरीके हो सकते हैं लेकिन समस्या समाधान अल्प अल्प साधनों में में शीघ्र हो हो जाये जाये जाये जाये जाये जाये जाये जाये जाये जाये जाये जाये जाये जाये जाये जाये जाये जाये जाये जाये जाये जाये जाये जाये जाये जाये जाये

फिर समस्या का समाधान ऐसा हो जो सम्बन्धित सभी पक्षों के अनुकूल हो। कोई भी पक्ष उसका विरोध न करे ऐसा और भी कठिन हो जाता है।। उदाहरण के लिए ، संस्था की समस्या 'उत्पादन बढ़ाने' की है। उत्पादन बढ़ाने के दो विकल्प हो सकते हैं।

पहला، मशीनीकरण द्वारा؛ तथा दूसरा ، अधिक श्रमिक लगाकर। यदि पहले विकल्प का चयन किया जाय मालिक इसका समर्थन करेंगे क्योंकि कम कम होगी होगी उत्पादन बढ़ेगा बढ़ेगा बढ़ेगा श्रमिक वर्ग वर्ग इसका इसका इसका क्योंकि क्योंकि क्योंकि बढ़ेगी।।।

हैं विकल्प का श्रमिक समर्थन करेंगे लेकिन मालिक विरोध कर सकते हैं यदि उत्पादन उत्पादन वृद्धि के साथ लागत में में में में वृद्धि वृद्धि है।। अतः व्यावसायिक अर्थशास्त्री को ऐसे किल्प को चुनना जिसमें न न तो बढ़े और और न ही बढ़े।। यदि ऐसा करने में वह सफल हो जाता तो वह वह एक कुशल अर्थशास्त्री माना जायेगा। समाज में उसका स्तर आदर की दृष्टि से देखा जायेगा।

है कार्यों के अतिरिक्त वर्तमान में बहुत से विद्वानों ने व्यावसायिक अर्थशास्त्री के कुछ और और विशेष कार्यों को को तीन तीन तीन तीन में बाँटा है है:

कार्य कार्य ( وظائف محددة):

व्यावसायिक अर्थशास्त्री के कुछ विशिष्ट कार्य होते हैं।

श्री एच. आई. एन्साफ ( مرحبا أنسوف ) है विशिष्ट कार्यों को तीन भागों में बाँटा है:

(1) व्यूह-रचना सम्बन्धी कार्य (وظائف استراتيجية):

पूर्ति अर्थशास्त्री को इन कार्यों के अन्तर्गत संगठन के की की पूर्ति साधनों के उपयोग योजनाओं का का तथा तथा तथा उपलब्ध वातावरण वातावरण वातावरण वातावरण के के के के के के के के के के के के के समायोजित समायोजित समायोजित समायोजित समायोजित समायोजित समायोजित समायोजित समायोजित।।।

(2) प्रशासन सम्बन्धी कार्य (وظائف إدارية):

करने कार्यों के अन्तर्गत संगठन के ढाँचे में करने करने अधिकार एवं एवं समन्वय समन्वय प्रभावपूर्ण प्रभावपूर्ण संचार व्यवस्था व्यवस्था तथा साधनों को जुटाने निर्णय लेने हैं।।

(3) कार्य-संचालन सम्बन्धी कार्य (وظائف التشغيل):

कार्यात्मक निर्णयों में दैनिक या प्रतिदिन से सम्बन्धित निर्णय होते हैं। ये निर्णय भी दो प्रकार के होते हैं। पहले ، दैनिक होते हैं जो व्यवसाय की प्रकृति में लिये लिये हैं तथा इनके लिए कम सोच सोच विचार विचार की की की होती है है दूसरे ، निर्णय आधारभूत होते हैं जो कि सोच विचार विचार के पश्चात् लिये लिये जाते।।

अतः एक व्यावसायिक अर्थशास्त्री का कार्य क्षेत्र काफी व्यापक व्यापक होता है। वह समुचित सांख्यिकी अभिलेख भी तैयार करता है।

के में व्यावसायिक अर्थशास्त्री के विशिष्ट कार्यों का सर्वेक्षण करने के बाद सर्वश्री के. जे. डब्ल्यू. एलैक्जेण्डर तथा एलैक्जेण्डर जी. केम्प ने निम्नांकित कार्यों को प्रतिपादित किया है:

(1) पूर्वानुमान पूर्वानुमान (توقعات المبيعات)

(2) शोध बाजार शोध (أبحاث السوق الصناعية)

(3) Analysis फर्मों का आर्थिक विश्लेषण (التحليل الاقتصادي للشركات المنافسة)

(4) उद्योग की मूल्य समस्याएँ (مشاكل تسعير الصناعة)

(5) परियोजनाएँ (المشاريع الرأسمالية)

(6) बनाना कार्यक्रम बनाना (برمجة الإنتاج)

(7) प्रतिभूति ، विनियोग ، विश्लेषण तथा पूर्वानुमान (الأمن ، الاستثمار ، التحليل والتنبؤ)

(8) Advice और जन-सम्पर्क सम्बन्धी सलाह देना (المشورة بشأن التجارة والعلاقات العامة)

(9) Advis माल के सम्बन्ध में सलाह देना (تقديم المشورة بشأن السلع الأساسية)

(10) Advis विनिमय के सम्बन्ध में सलाह देना (تقديم المشورة بشأن التبادل الأجنبي)

(11) Analysis का आर्थिक विश्लेषण (التحليل الاقتصادي للزراعة)

(12) Anal-विकसित अर्थव्यवस्थाओं का विश्लेषण करना (تحليل الاقتصادات المتخلفة) ، तथा

(13) वातावरण सम्बन्धी पूर्वानुमान लगाना (التنبؤ البيئي) |

इन कार्यों को देखने से यह निष्कर्ष जा सकता है कि व्यावसायिक अर्थशास्त्री का कार्य कार्य इन विद्वानों विद्वानों विद्वानों विद्वानों बहुत बहुत ही ही व्यापक है है।

पीटर ड्रकर ने विकल्पों का चयन करने के लिए कुछ आधार बताये हैं। उन आधारों के अनुसार एक व्यावसायिक अर्थशास्त्री विशिष्ट कार्य में में मितव्ययिता हानि की की जोखिमों को कम करता है।।

हैं प्रकार एक व्यावसायिक अर्थशास्त्री के कार्य हैं हैं हैं वह व्यावसायिक व्यावसायिक संस्थानों लिए ही करता करता करता करता करता करता करता सरकार सरकार को को को भी भी भी भी अपने अपने अपने अपने अपने हेतु हेतु हेतु हेतु हेतु हेतु हेतु मदद मदद मदद मदद मदद मदद


مقال # 3. uties अर्थशास्त्री के कर्त्तव्य ( واجبات خبير اقتصادي الأعمال):

एक व्यावसायिक अर्थशास्त्री का मुख्य कर्त्तव्य विभिन्न दायित्वों का निभाना है।

हैं पक्षों के प्रति व्यावसायिक अर्थशास्त्री के कर्त्तव्य निम्नलिखित हैं:

(1) S का निर्धारण (تحديد الأهداف):

व्यावसायिक अर्थशास्त्री को अपने कर्त्तव्यों के सम्बन्ध यह जानना व समझना आवश्यक है कि समस्या समस्या सुलझाने के के के के उसे उसे किस किस क्रम है।। सर्वप्रथम तो उसे उद्देश्यों का निर्धारण करना पड़ेगा। किसी भी संस्था के कुछ उद्देश्य होते हैं पूर्ण करना करना संस्था की सफलता माना जाता है।

समय तथा साधनों की कमी के कारण सभी उद्देश्यों की पूर्ति नहीं हो पाती।। अतः प्राथमिकता का निर्धारण करना व्यावसायिक अर्थशास्त्री का सबसे पहला कर्तव्य है। इस कर्त्तव्य के निर्वाह पर ही उसकी आगे की सफलता निर्भर है।

(2) विश्लेषण का विश्लेषण (تحليل المشكلة):

समझे अर्थशास्त्री का कर्तव्य है कि वह समस्या का विश्लेषण करे और उसे समझे इससे इससे समस्या के हल हल में में आसानी है।। अतः समस्या के विश्लेषण के अन्तर्गत सम्बन्धित तथ्यों को भी एकत्रित करना पड़ता है।।

(3) To जोखिमों को कम करना (للحد من مخاطر الأعمال):

व्यावसायिक अर्थशास्त्री का सबसे पहला कर्त्तव्य है कि अपनी योग्यता योग्यता से व्यापारिक जोखिमों को कम करे। व्यापार में निहित जोखिमों को पूरी तरह नहीं किया जा जा क्योंकि वह कोई भी भी अनिश्चितता अनिश्चितता के के के के के में में।।। अनिश्चितता के साथ जोखिम अनिवार्य है।

व्यावसायिक जोखिमें भी प्राय ، दो प्रकार की होती हैं। एक तो वे जिनका बीमा कराके स्वयं प्रबन्धक ही जोखिमों को हटा सकता है।। उदाहरण के लिए و उद्योग में में लग वाली जोखिम कच्चे कच्चे माल या निर्मित माल चोरी होने होने जोखिम तथा तथा श्रमिकों श्रमिकों पर पर पर कार्य कार्य कार्य कार्य कार्य करते करते हुए हुए हुए हुए हुए कार्य हुए हुए हुए जोखिम जोखिम जोखिम

इन जोखिमों को बीमा कराके टाला जा सकता है। दूसरी जोखिम वे होती हैं जिनका बीमा नहीं कराया जा सकता। उदाहरण के लिए ، बाजार में कीमतों के कम होने का भय या व्यापार चक्र ، आदि की सम्भावना।

(4) Economy में मितव्ययिता (الاقتصاد في الجهود):

व्यावसायिक अर्थशास्त्री का यह भी कर्त्तव्य है कि का का मूल्यांकन करते इस बात बात ध्यान में में कि कौन कौन सा कम कम कम कम से कम से से से प्रयासों प्रयासों प्रयासों प्रयासों प्रयासों प्रयासों प्रयासों प्रयासों प्रयासों।।।।। किसी कार्य को करने में जितने कम साधन लगेगें उतनी ही लाभ दर बढ़ेगी बढ़ेगी।

( 5) Economy-निष्पादन में समय की बचत (الاقتصاد في أداء الوظائف):

व्यावसायिक अर्थशास्त्री को चाहिए कि वह विकल्पों मूल्यांकन करते समय इस बात को ध्यान में कि कि कौन कौन से से विकल्प विकल्प से कम है है।। प्रबन्धकों के समक्ष कई बार इस प्रकार परिस्थितियाँ उत्पन्न हो जाती हैं और उनको अति अति निर्णय निर्णय कर कर कर लेना पड़ता है।।

अतः समय का तत्व बहुत ही महत्वपूर्ण हो जाता है। कार्य-निष्पादन में समय की जितनी बचत होगी कार्य कार्य कुशलता उतनी ही अधिक बढ़ेगी।

(6) Ach-निष्पादन में समय की बचत (تحقيق الكائنات في الوسائل المحدودة):

मिलेगी अर्थशास्त्री को प्रबन्ध विज्ञान में सफलता तभी मिलेगी जब कि वह कोई भी परामर्श देते इस इस तथ्य तथ्य तथ्य ध्यान ध्यान ध्यान रखे हैं हैं।। सीमित साधनों से ही लक्ष्य की प्राप्ति करनी है। अतः कार्य-निष्पादन का ऐसा तरीका होना चाहिए जिसमें साधन कम कम से लगें लगें। सीमित साधनों की वजह से व्यावसायिक कार्य कलापों में में रुकावट नहीं आनी चाहिए।

(7) Select विकल्प का चयन (اختيار أفضل بديل):

नीति-निर्धारण के विभिन्न विकल्पों को निश्चित के बाद निर्णयन प्रक्रिया अगला अगला चरण उन में में से से से एक एक सर्वश्रेष्ठ सर्वश्रेष्ठ चुनाव चुनाव है है।। अनुभव अर्थशास्त्री का कर्त्तव्य है कि वह अपने अनुभव، अनुभव، शोध एवं विश्लेषण، आदि के द्वारा सर्वश्रेष्ठ विकल्प विकल्प विकल्प चुनाव।।

व्यावसायिक अर्थशास्त्री को यह भी चाहिए कि वह का चयन चयन करते समय वास्तविकता को ध्यान में रखे। होते काल्पनिक परिस्थितियों में लिए गये निर्णय सही होते होते अतः सिद्धान्तों सिद्धान्तों से अधिक के के पहलू पर ध्यान ध्यान ध्यान चाहिए।

(8) क्रियान्वयन का क्रियान्वयन (تنفيذ القرار):

जब किसी समस्या के समाधान के लिए निर्णय ले लिया जाता है तो अगला अगला चरण उसको कार्यरूप प्रदान प्रदान करना है।। व्यावसायिक अर्थशास्त्री को इस प्रकार के प्रयास करने कि चुनी चुनी कार्य विधि विधि सुचारू रूप रूप लागू लागू की की की सके।

करना के अन्तर्गत कर्मचारियों को कार्य करने के लिए करना समन्वय समन्वय स्थापित स्थापित करना नियन्त्रण नियन्त्रण आदि से से सम्बन्धित सम्बन्धित का निर्धारण आते हैं हैं।

है व्यावसायिक अर्थशास्त्री के कर्त्तव्यों को निम्न दो भागों में रखा जा सकता है:

I. प्रबन्ध के प्रति कर्त्तव्य (واجبات الإدارة):

व्यावसायिक अर्थशास्त्री का कर्त्तव्य है कि वह प्रबन्धकों की महत्वपूर्ण निर्णय लेने में सहायता करे।।

अतः प्रबन्ध के उसके प्रमुख कर्तव्य निम्नलिखित हैं:

1. Help-रचना सम्बन्धी निर्णयों में मदद (للمساعدة في اتخاذ القرارات الاستراتيجية) ،

2. Help सम्बन्धी निर्णयों में मदद (للمساعدة في القرارات الإدارية) ،

3. Help-संचालन सम्बन्धी निर्णयों में मदद (للمساعدة في قرارات التشغيل) ،

4. Help योजनाओं के निर्माण में मदद (للمساعدة في صياغة التخطيط الأمامي) ،

5. Help को कम करने में मदद (للمساعدة في تقليل الشكوك)

6. Help एवं सुधार में मदद (للمساعدة في النمو والتحسين) ،

7. Help का का सामना، Help लिए योग्यता में सुधार लाने मदद (للمساعدة في تحسين القدرة على التكيف مع التغيير) ،

8. प्रबन्ध में भविष्य के प्रति विचार करने की प्रकृति को जागृत करने में मदद (To Help in Increasing Forward Looking Attitude in Management),

9. कार्य-संचालन की कुशल पद्धतियों का विकास करने में मदद (To Help in Developing Efficient Methods),

10. उद्देश्यों को प्राप्त करने में मदद (To Help in Achieving of Objects), तथा

11. आर्थिक मामलों पर प्रबन्धकों के भाषण तैयार करने में सहायता करना ।

II. समाज एवं राष्ट्र के प्रति कर्त्तव्य (Duties for Society and Nation):

एक व्यावसायिक अर्थशास्त्री के कर्त्तव्य वर्तमान समय में समाज एवं राष्ट्र के प्रति बढ़ते जा रहे हैं । समाज के अन्तर्गत उपभोक्ता तथा कर्मचारी, आदि आ जाते हैं । ये दोनों मिलकर एक समाज का बहुत बड़ा भाग हैं ।

प्रमुख रूप से इन कर्त्तव्यों के अन्तर्गत निम्नलिखित का समावेश किया जाता है:

(1) कर्मचारियों के लाभ एवं कल्याणकारी योजनाओं को बनाने में मदद (To Help in Making of Schemes for Employee's Benefit and Welfare)

(2) प्रेरणात्मक मजदूरी पद्धतियों को लागू कराने में मदद (To Help in Implementing of Incentive Wage Plans)

(3) उत्पादित माल की निरन्तर पूर्ति कराने में मदद (To Help in Continuous Supply of the Products)

(4) कालाबाजारी रोकने में मदद (To Help in Checking of Black Marketing)

(5) रोजगार के अवसर बढ़ाने वाली योजनाओं को प्रोत्साहित करने में मदद (To Help in Promoting Employment Providing Schemes)

(6) आर्थिक विकास में सरकार को मदद (To Help the Government in Economic Development),

(7) करों की चोरी रोकने में सरकार को मदद (To Help the Government in Checking of Tax-Evasion)

(8) आर्थिक साधनों का अधिकतम विदोहन करने में मदद (To Help in Maximum Utilization of Economic Resources)

(9) आर्थिक समस्याओं पर अपने विचार रखना व सुझाव देना (Giving Suggestions on Economic Problems) तथा

(10) मालिकों व कर्मचारियों में अच्छे सम्बन्ध विकसित करना (Developing Good Relation between Employer and Employees)


Essay # 4. व्यावसायिक अर्थशास्त्री के उत्तरदायित्व ( Responsibilities of a Business Economist):

व्यावसायिक अर्थशास्त्री के कार्यों एवं कर्त्तव्यों का अध्ययन करने के बाद उसके उत्तरदायित्वों की जानकारी होनी आवश्यक है । उत्तरदायित्वों के प्रति सचेत रहना व्यावसायिक अर्थशास्त्री के लिए परम आवश्यक है ।

उसे अपना उत्तरदायित्वों निभाने हेतु निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना चाहिए:

(1) उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए साधनों को जुटाना (Acquiring of Resources for the Attainment of Objectives):

उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए साधनों को जुटा कर उन्हें निश्चित समय के अन्दर प्राप्त करने का प्रमुख उत्तरदायित्व है ।

(2) विनियोजित पूँजी पर उचित लाभ-दर को कायम रखना (To Maintain Reasonable Rate of Profit on Invested Capital):

व्यावसायिक अर्थशास्त्री को सदैव यह देखना होगा कि व्यवसाय में लगी पूँजी पर लाभ-दर बढ़ती रहे । अतः उसका उत्तरदायित्व है कि वह प्रबन्धक को लाभ-दर में वृद्धि के लिए उपायों को बताता रहे । यदि लाभ-दर घटने की कोई भी आशंका है तो उससे बचने के लिए उपायों का सुझाव देना चाहिए ।

(3) आर्थिक सूचनाओं के स्रोतों का ज्ञान तथा विशेषज्ञों से सम्पर्क ( Knowledge of Sources of Information and Contacts with Experts):

व्यावसायिक अर्थशास्त्री को अपने कर्त्तव्यों को निभाने के लिए उन सभी स्रोतों को जानना होगा जिनके आधार पर आर्थिक घटनाओं की जानकारी हो सके तथा उन विशेषज्ञों से सम्पर्क स्थापित करना पड़ेगा जो उसको उद्देश्य पूर्ति के लिए उचित एवं सही सलाह दे सकें । हर व्यक्ति हर चीज का ज्ञाता नहीं हो सकता; अतः विभिन्न क्षेत्र के विशेषज्ञों से उसको सम्पर्क रखना पड़ेगा ।

(4) निर्णय-प्रक्रिया निर्धारित करना (To Develop the Decision-Making Process):

प्रबन्ध को दिन-प्रतिदिन निर्णय लेने पड़ते हैं अतः व्यावसायिक अर्थशास्त्री का यह उत्तरदायित्व है कि वह निर्णयों के लिए एक ऐसी प्रक्रिया निर्धारित करे जिससे प्रबन्ध स्वयं निर्णय ले सके ।

बहुत-सी ऐसी घटनाएँ होती है जिसमें शीघ्र निर्णय लेना पड़ता है तथा व्यावसायिक अर्थशास्त्री से सम्पर्क या राय लेने का समय नहीं मिल पाता है । ऐसी परिस्थितियों में यदि निर्णय प्रक्रिया से प्रबन्ध को अवगत करा दिया जाये तो कार्य बहुत अधिक आसान हो जाता है ।

( 5) सफल पूर्वानुमान (Successful Forecast):

व्यावसायिक अर्थशास्त्री का पूर्वानुमान के सम्बन्ध में उत्तरदायित्व बहुत अधिक है । किसी भी योजना या निर्णय की सफलता इस बात में निहित है कि पूर्वानुमान कितना सही होता है । अतः पूर्वानुमान लगाने में उसे उन सभी सांख्यिकी, गणितीय तथा आधुनिक तकनीकों को लगाना चाहिए जो भविष्य को स्पष्ट बना सकें ।

(6) त्रुटियों के प्रति प्रबन्ध को सचेत करना (Warning the Management for Errors in Prediction):

व्यावसायिक अर्थशास्त्री का यह उत्तरदायित्व है कि वह प्रबन्ध को उन सब त्रुटियों के प्रति शीघ्र ही सचेत कर दे जो पूर्वानुमान लगाने में हो गयी हैं । ऐसा करके वह संस्था को हानि से बचा सकता है । अतः गलतियों को मानकर उसमें सुधार लाना हर व्यक्ति का उत्तरदायित्व है ।

(7) प्रतिपुष्टि तथा नियन्त्रण (Feedback and Control):

जब किसी निर्णय को कार्य-रूप दिया जाता है तो व्यावसायिक अर्थशास्त्री का यह उत्तरदायित्व हो जाता है कि वह उन निर्णयों के प्रभावों का मूल्यांकन करे तथा सूचनाओं तथा कड़ी के माध्यम से उन पर पूर्ण नियन्त्रण करके निर्णयन-प्रक्रिया को चालू रखे ।

(8) प्रभावपूर्ण समन्वय (Effective Co-Ordination):

एक व्यावसायिक अर्थशास्त्री का उत्तरदायित्व नीतियों के निर्धारण तथा उसको कार्यरूप देने में होता है । यह तभी सम्भव हो सकता है जबकि वह नीतियों के निर्माण तथा उनके क्रियान्वयन में ताल-मेल बैठा सके ।

इसके लिए उसे प्रभावपूर्ण समन्वय प्रणालियों को अपनाना पड़ेगा । समन्वय उच्चस्तरीय प्रबन्ध से लेकर निम्न स्तर तक स्थापित करना पड़ेगा तथा प्रबन्ध एवं कर्मचारियों के मध्य प्रभावपूर्ण संचार व्यवस्था स्थापित करनी होगी ।

अतः व्यावसायिक अर्थशास्त्री का वर्तमान युग में महत्वपूर्ण योगदान है । उसकी भूमिका आर्थिक एवं व्यावसायिक जगत में बढ़ती जा रही है । वह अपने दायित्वों को कितनी सफलता से निभा पाता है, इस बात पर उसका भविष्य निर्भर है ।

उसके कार्यक्षेत्र से आशा तो यही है कि व्यावसायिक कार्यों में उसका योगदान तब तक रहेगा जब तक कि अनिश्चितता का वातावरण समाप्त नहीं हो जाता । व्यापार में अनिश्चितता को कम तो किया जा सकता है लेकिन समाप्त नहीं किया जा सकता । अतः व्यावसायिक अर्थशास्त्री प्रबन्ध-तन्त्र का एक आवश्यक अंग है । वह अनिश्चितता के मध्य निर्णय लेने में मदद करता है ।


Essay # 5. व्यावसायिक अर्थशास्त्री की भूमिका एवं महत्व ( Role and Importance of Business Economist):

आज के व्यवसाय जगत में व्यावसायिक अर्थशास्त्रियों का महत्व बढ़ता ही जा रहा है ।

प्रबन्ध की ऐसी बहुत-सी समस्याएँ है जिनका हल अर्थशास्त्र के सिद्धान्तों के द्वारा किया जा सकता है । उदाहरण के लिए, उत्पादन की मात्रा या इकाई का अनुकूलतम आकार निर्धारित करने के लिए हमको उत्पादन के नियम (Laws of Return) की मदद लेनी पड़ती है ।

मूल्य-निर्धारण में माँग की लोच (Elasticity of Demand), माँग का नियम (Laws of Demand), उपभोक्ता की बचत (Consumer Surplus), सीमान्त उपयोगिता के सिद्धान्त (Theory of Marginal Utility), आदि का सहारा लेना पड़ता है ।

इसी प्रकार व्यवसाय की लाभ-देय क्षमता निर्धारित करने में जोखिम का सिद्धान्त (Risk Theory of Profit), अनिश्चितता वहन करने का सिद्धान्त (Uncertainty-Bearing Theory), सीमान्त उत्पादकता का सिद्धान्त (Modern Theory of Profit), आदि का विश्लेषण करना पड़ता है ।

अतः व्यावसायिक समस्याओं के हल के लिए अर्थशास्त्र का ज्ञान आवश्यक है । व्यवसाय जगत में व्यावसायिक अर्थशास्त्रियों की भूमिका इसीलिए बढ़ती जा रही है । एक कुशल एवं योग्य व्यावसायिक अर्थशास्त्री अनिश्चितताओं का पूर्वानुमान लगाकर जोखिमों को कम कर सकता है ।

व्यावसायिक अर्थशास्त्री का एक दायित्व यह भी है कि वह प्रबन्धकीय निर्णयों को प्रभावित करने वाले तत्वों को निश्चित करे और उसके लिए अपने सुझाव दे, इसीलिए उसका महत्व और भी अधिक हो गया है ।

निर्णयों को प्रभावित करने वाले घटकों को दो भागों में बाँटा जा सकता है:

أ. आन्तरिक घटक (Internal Factors):

आन्तरिक घटक वे होते हैं जो प्रबन्धकों के नियन्त्रण में होते हैं या जो फर्म के कार्य-क्षेत्र के अन्तर्गत आते हैं । उदाहरण के लिए, कोई भी फर्म या संस्था इस बात के लिए स्वतन्त्र है कि वह कितनी पूँजी विनियोजित करे, कहाँ विनियोजित करे, कितने श्रमिकों को लगाये, उत्पादित वस्तुओं को किस प्रकार तथा कहाँ बेचे, वस्तु का मूल्य क्या निर्धारित करे, आदि ।

एक व्यावसायिक अर्थशास्त्री इन मामलों पर प्रबन्धकों को अपना मत देकर सही निर्णय लेने में सहायता प्रदान कर सकता है:

(i) उत्पादन का लक्ष्य

(ii) विक्रय का लक्ष्य

(iii) लाभ की मात्रा

(iv) विनियोजित नीति

(v) कोषों का उपयोग

(vi) नकद कोष सीमा

(vii) श्रमिकों की समस्याएँ

(viii) विपणन एवं विज्ञापन ।

ب. बाह्य घटक (External Factors):

ये वे घटक होते हैं जिन पर प्रबन्ध का नियन्त्रण नहीं होता; यह उनके कार्य-क्षेत्र से बाहर होते हैं । व्यावसायिक दशाओं को निश्चित करने वाले घटक इस सीमा के अन्तर्गत आते हैं । यह तत्व सामान्य व्यावसायिक दशाओं का निर्माण करते हैं तथा यह प्रत्येक व्यावसायिक कार्य को प्रभावित करते हैं । अतः यह घटक प्रायः प्रत्येक व्यावसायिक इकाई पर लागू होते हैं ।

इसीलिए इनको वातावरण सम्बन्धी घटक (Environmental Factors) भी कहते हैं । एक व्यावसायिक अर्थशास्त्री को इन घटकों का अध्ययन तथा ध्यान हमेशा रखना चाहिए तथा इनका विश्लेषण कर उनके प्रभावों से सर्वोच्च प्रबन्ध (Top Management) को अवगत कराते रहना चाहिए । अतः नीतियों के निर्धारण में इन तत्वों का समावेश करना अति आवश्यक है ।

बाह्य घटकों में प्रमुख रूप से निम्न का ज्ञान होना आवश्यक है:

(i) विश्वव्यापी, क्षेत्रीय तथा स्थानीय आर्थिक प्रवृत्तियाँ क्या हैं?

(ii) राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था का भविष्य कैसा है?

(iii) व्यापार चक्रों की गति क्या होगी?

(iv) नये बाजारों में उत्पादित वस्तुओं की माँग क्या होगी?

(v) सरकार की आर्थिक नीति क्या होगी?

(vi) नियन्त्रण तथा वित्तीय नीति क्या होने जा रही है?

(vii) प्रतियोगिता घटने या बढ़ने की क्या सम्भावनाएँ हैं?

(viii) पूँजी की लागत, ब्याज की दर तथा लाभ-दर बढेगी या घटेगी?

(ix) विदेशी व्यापार के सन्तुलन का क्या प्रभाव होगा?

(x) श्रमिक आन्दोलन का उत्पादन पर क्या प्रभाव होगा?

अतः एक व्यावसायिक अर्थशास्त्री प्रबन्ध को अपने महत्वपूर्ण सुझाव दे सकता है ।


 

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