مقال عن الأجور | الهندية | الإنتاج | اقتصاديات

إليك مقالة عن "الأجور" للصف 9 و 10 و 11 و 12. ابحث عن فقرات ، مقالات طويلة وقصيرة حول "الأجور" مكتوبة بشكل خاص لطلاب المدارس والكليات في اللغة الهندية.

مقال عن الأجور


محتويات المقال:

  1. Definition की परिभाषाएँ (تعريف الأجور)
  2. प्रकार के प्रकार (أنواع الأجور)
  3. Fact मजदूरी को निर्धारित करने वाले तत्व (العوامل التي تحدد الأجور الحقيقية)
  4. g सौदेबाजी एवं मजदूरी (المفاوضة الجماعية والأجور)
  5. Dif में भिन्नता (الفرق في الأجور)


مقال # 1. Definition की परिभाषाएँ ( تعريف الأجور):

मजदूरी वह पुरस्कार है जो उन श्रमिकों दिया जाता है जो वस्तुओं एवं सेवाओं के के में किसी किसी किसी किसी किसी का का श्रम श्रम हैं।। मजदूरी राष्ट्रीय लाभांश का वह भाग होता है श्रमिक को को उसके के बदले बदले में दिया है।। इस प्रकार मजदूरी शारीरिक या मानसिक श्रम के लिए भुगतान है।

(ط) प्रो. मैक्कॉनल के अनुसार ، "श्रम के उपयोग के लिए चुकायी गयी कीमत मजदूरी मजदूरी या मजदूरी कहते हैं।।"

(2) प्रो. बेन्हम के अनुसार ، "मजदूरी मुद्रा की उस राशि कहा जाता है जो एक मालिक श्रमिक को को को को के के अनुसार अनुसार अनुसार के लिए लिए।।"

कोई भी कार्य चाहे शारीरिक हो या यदि वह आंशिक रूप से पूर्ण पूर्ण रूप रूप मौद्रिक भुगतान भुगतान भुगतान लिए किया किया किया जाय उसे श्रम श्रम हैं।।। श्रम के लिए श्रमिक को प्राप्त होने वाला पुरस्कार मजदूरी कहलाता है। मजदूरी शब्द का अर्थशास्त्र में व्यापक अर्थ होता है। इसमें प्रति घण्टा، प्रति दिन، प्रति सप्ता، प्रति माह दिया जाने वाला भुगतान، डॉक्टर، वकील या अध्यापक की फीस، घर के नौकर दिया दिया दिया दिया दिया वाला वाला वाला वाला।।।।

मजदूरी देने के दो तरीके हैं:

(1) मजदूरी मजदूरी (الأجور الزمنية):

एक निश्चित समय के लिए श्रमिकों को जो दिया जाता जाता है उसे समयानुसार समयानुसार मजदूरी कहा है।। जैसे - प्रति घण्टा ، प्रति दिन ، प्रति सप्ताह अथवा प्रति माह आदि।

( 2) मजदूरी (قطعة الأجور):

जब श्रमिकों के कार्य के आकार या गुण के मजदूरी मजदूरी दी है तो तो उसे कार्यानुसार मजदूरी कहते हैं।। s के लिए ، यदि एक कुर्सी बनाने के लिए बढ़ई को s s s 15 दिये जायें तो वह कार्य मजदूरी (قطعة الأجور) कही जायेगी चाहे चाहे बढ़ई एक दिन बनाये अथवा अथवा सप्ताह में इससे इससे मजदूरी सम्बन्ध सम्बन्ध नहीं होता।।


مقالة # 2. Typ के प्रकार (أنواع الأجور):

A. नकद मजदूरी (الأجور الاسمية):

Money वह मजदूरी होती है जिसे श्रमिक को एक निश्चित समयावधि मुद्रा मुद्रा Money (نقود) Money चुकाया जाता है। समयावधि घण्टा ، दिन ، सप्ताह ، मास आदि कुछ भी हो सकती है। नकद मजदूरी मुद्रा की वह मात्रा है जो श्रमिक को को समय के हिसाब से दी जाती है।

s के लिए ، बैंक में काम करने वाले लिपिक s s Rs. 6000. s नकद मजदूरी के रूप में मिलता है और एक एक मकान बनाने वाले मजदूर को को s s s 20 प्रतिदिन नकद मजदूरी दी जाती है।

B. वास्तविक मजदूरी या असल मजदूरी (الأجور الحقيقية):

वास्तविक मजदूरी या असल मजदूरी से अभिप्राय एवं सेवाओं की उस मात्रा से है जो जो व्यक्ति अपनी अपनी अपनी अपनी अपनी मजदूरी मजदूरी द्वारा द्वारा है।। ains Inc में केवल नकद मजदूरी से जाने वाली वस्तुएँ सेवाएँ सेवाएँ ही आतीं वे वे वे लाभ लाभ लाभ प्रासंगिक प्रासंगिक प्रासंगिक लाभ ains ains प्रासंगिक प्रासंगिक प्रासंगिक प्रासंगिक प्रासंगिक प्रासंगिक ains ains ains ains ains ains ains ains ains ains ains ains ains ains ains ains ains ains ains ains ains ains ains ains ains ains ains ains ains ains ains ains ains ains ains ains ains ains ains ains ains ains ains ains ains ains ains ains ains ains ains

दूसरे शब्दों में، "किसी श्रमिक की वास्तविक मजदूरी वे सभी लाभ، सुविधाएँ शामिल होती हैं जो उसे नकद मजदूरी अलावा।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।। मकान मकान मकान मकान मकान मकान मकान، निःशुल्क चिकित्सा ، बच्चों के लिए निःशुल्क अथवा सस्ती दर पर शिक्षा व्यवस्था ، मनोरंजन की सुविधाएँ आदि।

ये सभी सुविधाएँ श्रमिक के रहन सहन के स्तर को को निर्धारित करती हैं। इसी कारण इन्हें वास्तविक मजदूरी में शमिल करते हैं। एक श्रमिक अपनी नकद मजदूरी के बदले वस्तुओं और सेवाओं सेवाओं जितनी मात्रा प्राप्त कर कर है है वही वही वही वही वही वास्तविक वास्तविक।।।


مقالة # 3. Fact मजदूरी को निर्धारित करने वाले तत्व ( العوامل التي تحدد الأجور الحقيقية):

हैं मजदूरी को निर्धारित करने वाले तत्व निम्नलिखित हैं:

(1) Purchas की क्रय-शक्ति ( القوة الشرائية للنقود):

हैं मजदूरी की गणना करते समय हमें दो बातें देखनी होती हैं:

(ط) नकद मजदूरी की मात्रा और

(ii) सामान्य कीमत-स्तर।

वास्तविक मजदूरी = P / W ، जहाँ W नकद मजदूरी और P सामान्य कीमत-स्तर है। 1 / P को मुद्रा की क्रय-शक्ति भी कहते हैं। अतः वास्तविक मजदूरी ज्ञात करने के लिए हमें मजदूरी में में मुद्रा क्रय शक्ति शक्ति का गुणा गुणा कर देना चाहिए।।

(2) आय आय (دخل إضافي):

वास्तविक मजदूरी ज्ञात करते समय हमें श्रमिक की आय और और अतिरिक्त आय के अवसर अवश्य देखने चाहिए। एक बैंक अधिकारी की नकद मजदूरी अधिक सकती है परन्तु कॉलेज के अध्यापक के लिए लिए आय आय के के के अवसर अधिक हैं।। उदाहरण के लिए ، अध्यापक ट्‌यूशन पढ़ाकर ، किताब लिखकर ، उत्तर-पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कर आदि साधनों द्वारा द्वारा द्वारा द्वारा आय आय प्राप्त है है।।

(3) Facilities के अलावा अन्य सुविधाएँ (مرافق أخرى بالإضافة إلى الأجور):

हैं व्यवसायों में श्रमिकों को नकद मजदूरी के अलावा अन्य अन्य सुविधाएँ भी दी जाती हैं हैं जैसे जैसे सस्ती दर दर पर निःशुल्क मकान मकान، मकान، चिकित्सा सुविधाएँ، बच्चों की، जिन श्रमिकों को ये सुविधाएँ दी जाती हैं उनकी वास्तविक मजदूरी अधिक होती है।।

(4) Hours के घण्टे (ساعات العمل):

दो श्रमिक समान कार्य की दशाओं में नकद दर दर कार्य करते हैं परन्तु से पहले पहले के के कार्य कार्य कार्य कम कम कम हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं।।।।।।।। ऐसी दशा में पहले श्रमिक की वास्तविक मजदूरी अधिक होगी। प्रायः यह कहा जाता है कि अध्यापकों कार्य करने के के कम होते हैं इस इस उनकी उनकी वास्तविक वास्तविक वास्तविक वास्तविक वास्तविक अधिक अधिक।।।

(5) Conditions की दशाएँ (شروط العمل):

वास्तविक मजदूरी कार्य करने की दशाओं से प्रभावित होती है। एक कारखाने में श्रमिकों को स्वच्छ एवं स्वस्थ में काम काम करने को कहा जाता है।

वेतन समय पर एवं सम्मान के साथ दिया है प्रकाश، प्रकाश की उचित व्यवस्था है है، दुर्घटना से बचाव के पूरे साधन उपलब्ध हैं हैं، आवश्यक काम करने करने के के के का का जाता है، सस्ती दर करने के जाता है है، हैं हैं و श्रम-कल्याण की दृष्टि से सरकारी कानूनों का पालन किया जाता है मनोरंजन मनोरंजन के साधन साधन जुटाये जाते हैं आदि।

स्पष्ट है कि ऐसी दशा में कारखाने में करने वाले वाले श्रमिकों की वास्तविक मजदूरी अधिक होगी।

(6) Nature की प्रकृति (طبيعة العمل):

नियमित रूप से कार्य में लगे श्रमिक की निश्चित रूप रूप से अस्थायी श्रमिक श्रमिक की अपेक्षा होगी।। जिन व्यवसायों में आश्रितों को भी रोजगार मिल है वहाँ वहाँ वास्तविक मजदूरी और भी अधिक होगी। रेलवे ، बैंक ، पोस्ट ऑफिस आदि में कर्मचारियों के को को भी रोजगार दिया जाता है। अतः उनकी वास्तविक मजदूरी अधिक होगी।

(7) Future में उन्नति की आशा (آفاق المستقبل):

जिन व्यवसायों में भविष्य में उन्नति के अवसर होते हैं हैं उनमें वास्तविक मजदूरी अधिक होती है। प्रायः कॉलेजों में अध्यापक जिस पद पर होते उसी उसी पद अवकाश ग्रहण कर कर जबकि जबकि जबकि आदि में में में यदि हों हों हों तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो।।।।।

(8) Extra के बिना अतिरिक्त कार्य ( عمل إضافي بدون أجر):

जिन व्यवसायों में व्यक्ति नियमित काम के के अलावा भी कार्य करता और और उसे उसे पारिश्रमिक नहीं नहीं नहीं उस दशा दशा दशा में मजदूरी कम कम है।।। प्रायः असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों साथ ऐसा ऐसा व्यावहारिक जीवन में होता है। दुकानों पर काम करने वाले नौकरों से मालिक घर का काम भी लेते हैं।।

(9) Pl की प्रियता (متعة العمل):

'सौ के दस कर दे नाम दरोगा रख यह यह कहावत कहावत तो प्रसिद्ध है। अतः जिन व्यवसायों में प्रतिष्ठा अधिक और जोखिम कम हो वहाँ वास्तविक मजदूरी अधिक होगी।। बगीचे में काम करने वाले माली की वास्तविक मजदूरी इंजन इंजन में झोंकने वाले वाले की मजदूरी से अधिक होगी।।

(10) लगात समय व लगात ( فترة التدريب والتكلفة):

है व्यवसायों में प्रशिक्षण समय व लागत बहुत अधिक लगती है، जैसे - डॉक्टर، इन्जीनियर आदि की सेवाएँ। इन कामों को सीखने में समय और लागत दोनों लगते लगते हैं कारण इनकी इनकी वास्तविक मजदूरी कम होती है।।

(11) व्यय सम्बन्धी व्यय (المصاريف التجارية):

कुछ व्यवसायों में कार्य कुशलतापूर्वक करने के लिए सम्बन्धी व्यय व्यय बहुत अधिक मात्रा में करना पड़ता है। अन्य विषयों के प्राध्यापकों की अपेक्षा अर्थशास्त्र प्राध्यापक इस इस से अधिक व्यय करना करना यदि यदि तथ्यों की की की नवीनतम चाहे चाहे तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो।।।।।।।

इस प्रकार हम कह सकते हैं कि श्रमिक वास्तविक मजदूरी मजदूरी से से तथ्यों तथ्यों पर निर्भर है।।

”अर्थशास्त्री एडम स्मिथ ने नकद तथा मजदूरी के अन्तर को स्पष्ट स्पष्ट करते कहा है” ”की की वास्तविक मजदूरी का अर्थ की अनिवार्यताओं अनिवार्यताओं अनिवार्यताओं अनिवार्यताओं अनिवार्यताओं अनिवार्यताओं अनिवार्यताओं अनिवार्यताओं अनिवार्यताओं बदले बदले बदले बदले बदले बदले बदले मुद्रा मुद्रा मुद्रा मुद्रा मुद्रा मुद्रा मुद्रा मुद्रा में दी जाती है। । श्रमिक को पारिश्रमिक अचित मिल रहा अनुचित मिल मिल रहा है श्रमिक धनी धनी निर्धन निर्धन निर्धन तथ्य तथ्य की की की से से लगाते लगाते हैं हैं हैं हैं हैं، नकद मजदूरी लगाते लगाते हैं हैं हैं हैं हैं

में में ، श्रमिक के जीवन स्तर का पता पता वास्तविक मजदूरी द्वारा ही ही लगता है।

m W m श्रमिकों की नकद मजदूरी और P सामान्य कीमत-स्तर है।


مقال # 4. सामूहिक सौदेबाजी एवं मजदूरी ( المفاوضة الجماعية والأجور):

Kar निर्धारण، कार्ल मार्क्स (كارل ماركس) ، सिडनी (سيدني) ، बैब (ويب) आदि अर्थशास्त्रियों ने ने श्रम संघ उनके द्वारा की सामूहिक सामूहिक सामूहिक सामूहिक सामूहिक सामूहिक सामूहिक सामूहिक को को को।।।।। वर्तमान समय में मजदूरों की मजदूरी एवं सुविधाओं के सन्दर्भ में सामूहिक सौदेबाजी मजदूरी निर्धारण निर्धारण का एक एक एक एक एक अंग अंग बन बन है।।

Meaning सौदेबाजी का अर्थ (معنى المفاوضة الجماعية) - जब मजदूर मजदूर श्रम संघ के में होकर सेवायोजकों सेवायोजकों सेवायोजकों सेवायोजकों सेवायोजकों सेवायोजकों सेवायोजकों सेवायोजकों एवं एवं अन्य अन्य अन्य अन्य अन्य अन्य अन्य अन्य अन्य अन्य अन्य अन्य अन्य अन्य अन्य अन्य अन्य अन्य अन्य हैं हैं।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।। सेवायोजकों सेवायोजकों सेवायोजकों सेवायोजकों सेवायोजकों सेवायोजकों सेवायोजकों सेवायोजकों सेवायोजकों सेवायोजकों सेवायोजकों (أصحاب العمل)

प्रतिष्ठित अर्थशास्त्रियों ने सामूहिक सौदेबाजी के महत्व स्वीकार नहीं किया किन्तु आधुनिक अर्थशास्त्री मजदूरी निर्धारण निर्धारण श्रमिक संघों संघों संघों संघों सकारात्मक सकारात्मक भूमिका भूमिका को हैं।।

Employ की की बेरोजगारी निम्न आर्थिक आर्थिक नियोजकों नियोजकों की नियोजकों नियोजकों नियोजकों नियोजकों नियोजकों Employ Employ Employ Employ Employ ers में में में में जिसके कारण कारण कारण कारण कारण कारण कारण कारण कारण कारण कारण कारण कारण कम कम कम कम।।।।।।।।।।।।

g संघ संघ में सौदेबाजी सौदेबाजी सौदेबाजी सौदेबाजी सौदेबाजी सौदेबाजी सौदेबाजी सौदेबाजी (المفاوضة الجماعية) में वृद्धि करके करके नियोजकों को को उत्पादकता के के के बराबर मजदूरी मजदूरी मजदूरी मजदूरी मजदूरी मजदूरी मजदूरी मजदूरी मजदूरी मजदूरी मजदूरी मजदूरी मजदूरी।।।।।।।।।।

दूसरे श्रमिक संघ नियोजकों द्वारा आधुनिकीकृत प्रक्रिया अपनाकर व्यापारिक संगठन को सुव्यवस्थित कराकर कराकर श्रमिकों में में एवं एवं एवं कल्याणकारी कल्याणकारी प्रसार करके करके करके करके करके करके करके करके करके करके करके करके करके करके करके करके करके करके करके करके करके करके करके करके तीसरे ، श्रमिक संघ किसी विशेष व्यवसाय में भी की पूर्ति पूर्ति सीमित उनकी उनकी मजदूरी बढ़ा हैं हैं।

है प्रयत्न श्रमिक संघों द्वारा निम्नलिखित दशाओं में किया जा सकता है:

(i) यदि वस्तु का उत्पादन श्रम गहन और उसे किसी किसी साधन से उत्पादित न किया जा सके।

(ii) उत्पादित वस्तु की माँग बेलोचदार अर्थात् वस्तु की कीमत कीमत से वस्तु की माँग अप्रभावित रहे।

(iii) उत्पत्ति के अन्य साधनों की पूर्ति सीमित न हो।

(iv) यदि श्रमिकों की मजदूरी का उत्पादक के कुल मजदूरी बिल एक एक भाग भाग हो कि कि मजदूरी मजदूरी अधिक भी भी वस्तु वस्तु वस्तु वस्तु वस्तु वस्तु वस्तु वस्तु वस्तु वस्तु वस्तु वस्तु वस्तु वस्तु वस्तु वस्तु वस्तु।।।

age में श्रमिक संघ उपर्युक्त उपायों से की केवल मौद्रिक में ही वृद्धि वृद्धि नहीं श्रमिकों श्रमिकों जीवन जीवन जीवन जीवन करके तथा तथा तथा समय समय समय समय समय समय समय समय समय समय समय पर समय पर पर पर पर पर पर मजदूरी मजदूरी मजदूरी मजदूरी मजदूरी मजदूरी मजदूरी मजदूरी मजदूरी मजदूरी मजदूरी W मजदूरी मजदूरी मजदूरी मजदूरी चित्र की कार्यक्षमता का मजदूरी पर जो प्रभाव पड़ता उसे उसे में 4 में प्रदर्शित चित्र गया है।

P 4 में श्रमिक की प्रारम्भिक सीमान्त आय P MRP है। P संघ के विविध बढ़कर के परिणामस्वरूप बढ़कर बढ़कर P MRP हो जाती है।

Improvement की इस क्षमता-सुधार (تحسين الكفاءة) मजदूरी कारण सन्तुलन की दशा मजदूरी W OW "(F NF) हो जाती है जबकि जबकि स्तर स्तर स्तर का का पड़ता।।।। Improvement इस दशा में श्रमिक संघ की भूमिका कही जा सकती है बिना रोजगार रोजगार स्तर कमी के के के के मजदूरी मजदूरी मजदूरी दर दर करने में में सफल सफल सफल सफल हैं।।।


مقالة # 5 . Dif में भिन्नता ( الفرق في الأجور):

विभिन्न व्यवसायों में एक ही प्रकार के कार्य वाले श्रमिकों श्रमिकों की में भिन्नताएँ भिन्नताएँ देखने में हैं।।

इस मजदूरी की भिन्नताओं के निम्नलिखित कारण हैं:

أ. कार्य-क्षमताओं में अन्तर:

मजदूरों की कार्यक्षमता का मजदूरी की दर पर अत्यधिक प्रभाव पड़ता है। अतः अधिक कार्य-क्षमता वाले श्रमिकों को उन श्रमिकों अधिक अधिक मजदूरी की जाती जाती है कार्य कार्य क्षमता क्षमता अपेक्षाकृत अपेक्षाकृत अपेक्षाकृत कम है है।

ب. रोजगार की नियमितता:

है व्यवसायों में कार्य निरन्तर व नियमित रूप से रहता रहता है वहाँ श्रमिकों को को मजदूरों से अपेक्षाकृत अपेक्षाकृत मजदूरी मजदूरी प्रदान प्रदान प्रदान जहाँ जहाँ जहाँ जहाँ जहाँ जहाँ जहाँ जहाँ जहाँ जहाँ जहाँ जहाँ कार्य।।।।

ج. स्थान विशेष पर द्रव्य की क्रय-शक्ति:

हैं स्थानों पर द्रव्य की क्रय शक्ति कम होती है अर्थात् वस्तुओं सेवाओं सेवाओं के के होते होते हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं के के के के के के।।।।।। इसी कारण महानगरों में सामान्य नगरों की अपेक्षा मजदूरों से अधिक मजदूरी दी जाती है।।

د. कार्य का स्वभाव:

सरल، रुचिकर، स्वास्थ्यकर व सम्मानित कार्यों के लिए मजदूरी मजदूरी प्रदान जाती है है، जबकि अरुचिकर، घृणित एवं जोखिम वाले व्यवसायों में की की दर है।।।

ه. प्रशिक्षण व्यय:

है व्यवसायों को सीखने में कम व्यय तथा कम समय लगता है उन व्यवसायों व्यवसायों में मजदूरी की दर कम कम है है। इसके विपरीत, जिन व्यवसायों के प्रशिक्षण में समय तथा व्यय अधिक होता है उन व्यवसायों में मजदूरी अधिक प्रदान की जाती है । यही कारण है कि एक डॉक्टर तथा इंजीनियर को एक अध्यापक की अपेक्षा अधिक मजदूरी दी जाती है ।

F. नौकरी की सुरक्षा एवं पदोन्नति की आशा:

निजी व्यवसाय की अपेक्षा सरकारी नौकरी में व्यक्ति कम वेतन लेने पर ही उद्यत हो जाते हैं क्योंकि सरकारी नौकरी में निजी व्यवसाय की अपेक्षा नौकरी की अधिक सुरक्षा होती है ।

ز. गतिशीलता का अभाव:

कभी-कभी श्रमिक सामाजिक तथा आर्थिक परिस्थितियों के कारण ऐसे स्थानों पर पहुँचने में असमर्थ रहते हैं जहाँ उन्हें अधिक मजदूरी प्राप्त हो सकती है और वे अपने ही स्थान पर कम मजदूरी पर कार्य करते हैं ।

هيدروجين. अतिरिक्त सुविधाएँ:

जिन व्यवसायों में कर्मचारी को नकद मजदूरी के अतिरिक्त अन्य सुविधाएँ भी प्रदान की जाती हैं उदाहरणार्थ, मकान की सुविधा, निःशुल्क डॉक्टरी सहायता आदि वहाँ नकद मजदूरी प्रायः कम दी जाती है ।

أنا. कार्य के घण्टे व अवकाश:

जिन व्यवसायों में कर्मचारी को अधिक समय तक कार्य करना पड़ता है व अवकाश भी कम मिलता है वहाँ मजदूरी अधिक प्रदान की जाती है किन्तु उन व्यवसायों में जहाँ कार्य अपेक्षाकृत कम समय तक करना पड़ता है एवं छुट्टियाँ भी अधिक प्राप्त होती हैं वहाँ मजदूरी कम प्रदान की जाती है । इसी आधार पर एक बैंक के क्लर्क को एक स्कूल के क्लर्क की अपेक्षा अधिक वेतन प्राप्त होता है ।

ي. कार्य की विश्वसनीयता:

जिन व्यवसायों में ईमानदारी तथा विश्वास का विशेष महत्व है उनमें प्रायः ऊँचे वेतन ही दिये जाते हैं । इसी कारण एक बैंक मैनेजर तथा न्यायाधीश को ऊँचा वेतन दिया जाता है ।

ك. श्रमिकों की मोलभाव करने की शक्ति:

जिन व्यवसायों में श्रमिकों का संगठन सुदृढ़ होता है वहाँ के श्रमिकों में मोलभाव करने की शक्ति अधिक होती है । अतः वे अपेक्षाकृत अधिक मजदूरी प्राप्त करने में सफल हो जाते हैं । प्रायः बड़े उद्योगों में संगठित श्रम संघ होने के कारण श्रमिक ऊँची मजदूरी प्राप्त करने में सफल हो जाते हैं, जबकि छोटे उद्योगों में असंगठित श्रम के कारण श्रमिक कम मजदूरी पर ही कार्य करते रहते हैं ।


 

ترك تعليقك